नेपाल से आये टिकेन्द्र का भोलापन
शिकंजे में बदलती दीवारें टिकेन्द्र नाम होगा उसका, जिसे वह कुछ अजीब से लहज़े में टिकेन्दर कह कर बताता है. जन्मतिथि उसके लिए एक गैर जरूरी सी चीज है. उम्र पूछने पर वह टालने वाले अंदाज़ में, शाय... Read more
जलते जंगल का वसंत
आज सुबह आँख खुली तो मन कुछ उद्विग्न था. बेसिरपैर का, पता नहीं क्या सपना देखा था रात को, कि पिताजी के स्वास्थ्य की चिंता लग गयी. उम्र के 96 वर्ष देख चुके ‘पप्पा’ के स्वास्थ्य को लेकर, बावजूद... Read more
देवीधूरा: आस्था की चट्टानें और सच्चाई के प्रहार
कौतूहल, कुछ देख कर उसके बारे में बहुत कुछ, सब कुछ जानने की कोशिश करना संभवतः मनुष्य का जन्म-जात स्वाभाव है. हमारी शोध की प्रवृत्ति, तकनीक, वैज्ञानिक सोच इत्यादि ने हमारे चारों ओर फैली अनगिनत... Read more
फिर आयेगा धुन्नी
मुंशी प्रेमचंद की क्लासिक कहानी ‘ईदगाह’ की शुरुआत, अगर मुझे ठीक से याद है, तो कुछ इस तरह से है- “रमज़ान के पूरे तीस रोज़ बाद ईद आयी…”. क़िस्सागोई वाले सीधे सपाट... Read more
निश्चित ही कब्रिस्तानों का एक आकर्षण होता है! निस्तब्धता, निरभ्रता, शायद इस जगह से मुखर कहीं ओर नहीं होती. और फिर पहाड़ों के कब्रिस्तान तो सम्मोहित सा करते हैं अक्सर. नैनीताल, रानीखेत, अल्मो... Read more
भीमताल और टूट चुके पत्थर का दर्द
शायद 69-70 के दशक की बात होगी, मैं तब भीमताल के एल. पी. इंटर कॉलेज में आठवीं या नवीं का छात्र रहा होउंगा. जून के आख़िरी सप्ताह या फिर जुलाई की शुरुवात थी. शाम के वक्त अचानक एक खबर सुनी, बाज़ार... Read more
नैनीताल को बर्बाद होना है, हो कर रहेगा
पिछले साल बरसातों में नैनीताल की मॉलरोड का ढहना एक प्रतीक्षित हादसा था. इसे ढहना ही था, ढह गयी. शायद किसी भी ऐसे सामान्य समझ वाले व्यक्ति को आश्चर्य नहीं हुआ होगा जिसे प्रकृति और पहाड़ की थोड़... Read more
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