एक बार तो लगता है कि झपटकर कर लें, लेकिन फिर दिमाग चोक लेने लगता है. यहां तक आते-आते दिल की मोटरसाइकिल भी तीस से नीचे का एवरेज देने लगती है. गनीमत बस इतनी है कि रुक-रुककर ही सही, चलती तो है.... Read more
यूपी के दो दोस्तों की चिठ्ठियाँ
प्रमुख रूप से चिंता का विषय निश्चित रूप से गधा चिंतन ही है -राहुल पाण्डेय प्रिय मिरगेंदर, तुमने अपनी चिट्ठी में मुझसे जो सवाल पूछा, यकीन मानो उस सवाल ने क्या दिन और क्या रात, मुझे बेचैन... Read more
असल आवाज का जादू नकलची नहीं समझेंगे
असल आवाज का जादू नकलची नहीं समझेंगे -राहुल पाण्डेय कुछ साल पहले अयोध्या में एक शायद कभी न बनने वाली फिल्म के लिए ऑडिशन ले रहा था. कला की गर्मी में उबलते लोगों की कतार लगी थी, पर हम ठंडे होते... Read more
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