शिखरों के स्वर : ‘स्त्रीधन’ गौरा मैसर तीज
लॉ की पढ़ाई करते वक़्त हिन्दू लॉ की किताब में शादी के शीर्षक में एक शब्द पढ़ा था “स्त्रीधन” यानी विवाह के वक़्त जो उपहार (जेवर,चल अचल संपत्ति,और भी तमाम उपहार) नवेली वधु को दिया... Read more
जून का पहला हफ्ता कुछ गर्म थपेड़ों वाला लेकिन मानसून की आश में झूमता हुआ मानसून पूर्व बारिशों में भीग रहा है,सूख रहा है,सँवर रहा है. शहर की आपाधापी में मौसम और प्रकृति को करीब से देखना मुश्क... Read more
एक चिट्ठी कोरोना दौर के हवाले से
देर रात तक ख्वाबों में भटकने वाली आँखें सुबह देर से ही उठने के रिवाज़ का शौक रखती हैं मगर अलविदा के चैत और उकाव लगे बैशाख की सुबहें जाग उठती हैं, पार धार में बासती चिड़ियाओं के मीठे शोर से.... Read more
अपने ही कलाकारों का तिरस्कार कर संस्कृति का कैसा महोत्सव मनाया जा रहा है अल्मोड़ा में
मैं ये बात अब कहना जरूरी समझता हूँ या अब चुप नहीं रहा जाता. कल ठीक इसी समय फ़ोन पर अपने दगड़ी से इस बात पर चर्चा हो रही थी कि एक महान लोकगायक की बेटी के लिए अपना इलाज कराना असंभव हो रखा है ह... Read more
रसमलाई का ज़ायका
अब से तुम्हारे साथ कहीं आना ही नही है… कहीं नहीं. शिखर होटल चौराहे से एनटीडी की ओर जाती लिंक रोड के एक रेस्तराँ के बाहर ये स्वर थे रौनक के . नीली जीन्स उस पर घुटनों तक लटकता बूटेदार गर... Read more
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