सिल्ला और चिल्ला गाँव – लीलाधर जगूड़ी हम सिल्ला और चिल्ला गाँव के रहनेवाले हैंकुछ काम हम करते हैं कुछ करते हैं पहाड़उत्तर और दक्षिण के पहाड़ हमें बाहर देखने नहीं देतेवह चील हमसे ज्यादा... Read more
कुछ काम हम करते हैं कुछ करते हैं पहाड़
पहली जुलाई 1944 को उत्तराखंड के टिहरी जिले के धंगण गाँव में जन्मे लीलाधर जगूड़ी वर्तमान समकालीन में हिन्दी के शीर्ष कवियों में शुमार किये जाते हैं. उनकी प्रमुख कृतियों में शंखमुखी शिखरों पर (... Read more
एक डग भीतर जाने के लिए सौ डग बाहर आना पड़ता है
अपनी नई कविताओं की रोशनी में कवि लीलाधर जगूड़़ी -शिवप्रसाद जोशी लीलाधर जगूड़ी अपनी ही कविता में एक नवागंतुक की तरह दाखिल हो रहे हैं और भीतर जितना पड़े हैं उससे कहीं ज़्यादा बाहर खड़े हो गए... Read more
मेरे घर का भी सवाल है : लीलाधर जगूड़ी की कविता
ईश्वर और आदमी की बातचीत -लीलाधर जगूड़ी जानते हो यह मूर्ति मेरी है और कुछ लोग इसे पूजने आ रहे हैं तुम्हें क्या चाहिए? क्या तुम्हारा भी व्रत है? नहीं नहीं, यह मूर्ति मेरी है और यह बिक चुकी है ख... Read more
प्राचीन संस्कृति को अंतिम बुके पारंपरिक भारतीय कलियों और फूलों की ख़ुशबुएँ पांडवों की तरह स्वर्गारोहण की सदिच्छा से हिमालय की ओर चली गई हैं. क्योंकि जिन फूलों का भारतीयकरण किया गया है उनमें... Read more
आषाढ़ -लीलाधर जगूड़ी यह आषाढ़ जो तुमने मां के साथ रोपा था हमारे खेतों में घुटनों तक उठ गया है अगले इतवार तक फूल फूलेंगे कार्तिक पकेगा हमारा हँसिया झुकने से पहले हर पौधा तुम्हारी तरह झुका हुआ ह... Read more
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