फागुन को पौड़ी के बड़े याकूब का इन्तजार रहता है
होली है जो बैरभाव को जगाती है और न जात-पात को देखती है और न छोटे-बड़े का भेद समझती है. ऐसा त्यौहार भारतीय संस्कृति के अतिरिक्त कहीं नहीं दिखाई देता है. जिसमें सचमुच समाज आपसी मनमुटाव को भुला... Read more
बच्चों ने भरे थे टिहरी की होली में रंग
हिमालय की उपत्यका में बसा गढ़वाल यूं तो अपनी, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं धार्मिक आस्थाओं की वजह से अपनी गौरवमयी छवि के लिए प्रसिद्व है. वहीं यह क्षेत्र अपनी आध्यात्मिक चेतना के लिए भी याद किया ज... Read more
जब कभी पर्वतीय संस्कृति की चर्चा होती है, विशेषकर कुमाउंनी संस्कृति की तो स्वतः ही यहां की बैठकी होली (Kumaon Baithki Holi) गायन का सन्दर्भ मानस पटल पर उभरने लगता है. होली गायन की परम्परा कु... Read more
मेरा बचपन अल्मोड़ा के समीप सतराली में बीता. सतराली की होली प्रसिद्व थी. बसन्त पंचमी से होली गायन आरम्भ होता था. ढोलक में जौ चढ़ाकर रात में गांव के चौपाल में अलाव के आगे होली गाई जाती थी. बच्चे... Read more
कुमाऊं की रंगीली होलियां -चारू चन्द्र पांडे कुमाऊँ में होलियों का पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है, होली की एकादशी को रंग-भरे सफेद वस्त्र धारण किये जाते हैं एक डंडे पर नये कपड़े की धारियाँ या... Read more
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