हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने : 33
कुमाऊं अंचल में कई प्रख्यात कलाकारों, रंगकर्मियों, साहित्यकारों ने जन्म लिया. उनमें से कुछ को जाना गया, कुछ उपेक्षित रहे और कुछ गुमनामी का जीएवन जीकर चले गए. प्रख्यात नृतक हरीश चन्द्र भगत भी... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने : 32
कुमाऊँ का प्रवेश द्वार हल्द्वानी व्यावसायिक नगर के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भी अग्रणी रहा है. शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में विद्वानों की महफिलें आज भी यहाँ जुटती हैं. यद्यपि व्यावस... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने : 31
रानी बाग यहां का एक पवित्र स्थान माना जाता है यहां एक पुराना चित्रेश्वर शिवालय के नाम से मंदिर है इस मंदिर को 25 जनवरी 1880 में रामगढ़ के चतुर सिंह द्वारा बनवाकर प्रतिष्ठित किया गया था यहां... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने : 30
बाबा नीम करोली महाराज को लेकर भी श्रद्धालुओं में अगाध श्रद्धा रही है अपने बचपन को याद करते हुए डॉ. मुनगली बताते हैं सन 1952 में जब वह दो-तीन साल के थे घर से बाहर घूमते हुए खो गए. ढूंढ खोज के... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने : 29
पहाड़ की प्रमुख मंडी हल्द्वानी के आबाद होने की कहानी बहुत रोचक है. इसका वर्तमान चाहे कितना ही स्वार्थी हो गया हो इसका भूतकाल बहुत ईमानदार और विश्वास पर आधारित था. मूल रूप से रानीखेत के रहने व... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने : 27
गौला पार में कालीचौड़ का मंदिर भी पुरातत्विक महत्त्व का है किन्तु इस सम्बन्ध में अभी तक खोज नहीं की जा सकी है. कहा जाता है कि बिजेपुर गाँव में राजा विजयचंद की गढ़ी थी. उसके निकट ही कालीदेव की... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने – 22
सन् 60-70 के दशक में साम्यवादी विचारधारा के नाम पर बहुत से पाजी लोगों का जमघट मैंने यहां देखा. वे काम बिल्कुल नहीं करना चाहते थे और कहते थे कि पूंजीपतियों की सम्पत्ति बांट ली जानी चाहिए. वे... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने – 21
यदि आज किसी विधायक को आबकारी मंत्री बना दिया जाए तो उसका बेडा पार. मंत्री हो जाने की बात तो दूर की, यदि किसी दमदार विधायक को शराब का ठेकेदार विरोध में खड़े होने वालों को खरीदने की जिम्मेदारी... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने – 20
आजादी की लड़ाई में बहुत बड़ा योगदान देने वालों और बाद में क्षेत्र का नेतृत्व करने वालों के सम्बंध में कुछ खरी-खरी कहना उनके सम्मान में कमी लाना नहीं है. बल्कि यह बताना है कि राजनीति में यह सब... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने – 19
बात स्वराज आश्रम से चल कर आजादी के दीवानों की हो रही थी. इसी क्रम में वर्तमान राजनीति पर चर्चा कर लेना भी गलत न होगा. हल्द्वानी शहर आजादी की लड़ाई के समय से ही कुमाऊॅ मंडल की रानजीति का अखाड़ा... Read more
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