उत्तराखंड सरकार और प्राइवेट स्कूलों के पचड़े में फंसा वंचित छात्र-छात्राओं का भविष्य
Posted By: Kafal Treeon:
विगत वर्ष प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद जिस विभाग में सर्वाधिक क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का दावा सरकार ने किए थे. उसकी धार एक साल से कुछ अधिक वक्त में कुंद पड़ गयी है. प्रदेश के अलग-... Read more
बागेश्वर के सुनहरे भविष्य के साथ खिलवाड़
Posted By: Kafal Treeon:
सरकार के हज़ार दावों के बाद भी सरकारी शिक्षा व्यवस्था पटरी पर वापस नहीं आ सकी है. एक तरफ शिक्षकों की कमी लगातार बनी हुई हैं वहीं सरकार प्रदेश भर में मानकों के अनुरूप शिक्षकों की नियुक्ति करने... Read more
Popular Posts
- उत्तराखंड बजट : स्वयं स्फूर्ति से परिपक्वता की ओर
- बर्बर इतिहास का नाम क्यों ढो रहा है ‘खूनीबढ़’
- कौन थे पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा ‘लकुलीश’?
- कैसे अस्तित्व में आया नारायण आश्रम और कौन थे नारायण स्वामी?
- घमंडी पिता और उसकी सीख
- उत्तराखंड के पेड़-पौधे: लोकज्ञान और औषधीय सत्य
- सामाजिक उत्पीड़न को सम्पूर्णता में व्यक्त करते हैं ‘जागर गीत’
- क्या चंद शासकों से पहले अल्मोड़ा में नंदादेवी का कोई मंदिर था?
- ‘काल्द’ यानी भैरव पहली बार कैसे प्रकट हुए?
- कैसा था नंदा देवी में गायब हुआ परमाणु डिवाइस?
- उपकोशा और उसके वर
- मेहनती भालू और चालाक सियार की लोककथा
- बाल, माल व पटालों का शहर : अल्मोड़ा
- आज ‘नशा नहीं-रोजगार दो आन्दोलन’ की 42वीं वर्षगांठ है
- 200 साल पुराने यात्रा-वृतांत में कुमाऊँ के ‘खस’
- तिवारी मॉडल में पहाड़ की उद्योग नीति और पलायन
- बंदर बहादुर के चोर तेंदुए को जंगल से भगाने वाली लोककथा
- 200 साल पहले कैसा था उत्तराखंड
- जब तक सरकार मानती रहेगी कि ‘पलायन’ विकास की कीमत है, पहाड़ खाली ही होते रहेंगे
- एक रोटी, तीन मुसाफ़िर : लोभ से सीख तक की लोक कथा
- तिब्बती समाज की बहुपतित्व परंपरा: एक ऐतिहासिक और सामाजिक विवेचन
- इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक स्मृति के मौन संरक्षक
- नाम ही नहीं ‘मिडिल नेम’ में भी बहुत कुछ रखा है !
- खेती की जमीन पर निर्माण की अनुमति : क्या होंगे परिणाम?
- नेपाल के रहस्यमयी झांकरी : योगी, वैद्य, तांत्रिक या ओझा?
