मयनोशों का लॉकडाउन और शहंशाह मास्स्साब का किस्सा
लॉकडाउन के चलते जब सब कुछ बंद है तो ऐसे में कई किस्से खुल रहे हैं. हर वो दौर चर्चाओं में आ रहा है जिसका असर आज के ठप पड़े बाजारों से है. किस्सों की पोटली जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वो... Read more
बैंक का नाम जेहन में आते ही पहले रूपये, फिर एटीम दिमाग में आ जाता है. उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में एक नया बैंक खुला है. वो भी कोरोना (कोविट-19) के इस दौर में. श्री लक्ष्मी भंडा... Read more
इस बार नहीं आयी भिटौली
जो भागी जियाला ईजू नौ रितु सुण ल वे गयो रे मनखा ईजु काँ रितु सुणौ ल वे जब ये रचना रची गई होगी तब रचनाकार ने बहुत आगे की दुनिया देख ली होगी. संभव है आज की दुनिया भी. चैती के बोल जब कानों में... Read more
पिथौरागढ़ के छात्र आंदोलन में कहां खड़े हैं राजनैतिक पार्टियों से जुड़े छात्रसंगठन
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ महाविद्यालय में 4 हफ्तों से एक आंदोलन चल रहा है जिसकी गूंज राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया तक पहुंच चुकी है. छात्रों द्वारा चलाये गए इस आंदोलन के समर्थन में अभी तक रा... Read more
कहां तो तय था चरागां हर एक घर के लिए कहां चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए दुष्यंत साहब की इन पंक्तियों के साथ याद करतें उस आंदोलन के दौर को जिसकी भट्टी में एक छात्र और मजदूर होम हो गए. तब... Read more
Popular Posts
- उत्तराखण्ड में वन्य-जीवों का आतंक
- उनके बारे में जो सिर्फ नाम नहीं जीवन हैं
- उत्तराखण्ड के आयुष के हाथ में दिल्ली की रणजी टीम की कमान
- उत्तराखण्ड की उन्नति शर्मा ने देश का गौरव बढ़ाया, कॉमनवेल्थ -26 में जीता कांस्य
- बचपन से छीन ली गई बचपन की तस्वीर
- खसों पर हुए वैज्ञानिक अध्ययन
- वह माला के गेट पर सुबह-शाम पहरा देते मिलता
- पहाड़ो में भूस्खलन
- जर्मन की लड़ाई और रुद्रनाथ की चढाई
- हिमालय की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर प्रोफेसर पूरन चंद्र जोशी
- हैप्पी बर्थडे कॉर्बेट साहब
- 28 साल के युवा से जब टिहरी रियासत डर गई
- दुनिया में शांतिपूर्ण आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास
- गांधीजी ने दुनिया के सबसे बड़े अहिंसक आंदोलन का संचालन कैसे किया?
- भारत में आँसू गैस के गोले सबसे पहले अंग्रेज़ लाए थे
- कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल
- हरेला: प्रकृति, परंपरा और विज्ञान का अद्भुत संगम
- हरेले के रंग में पहाड़ : फोटो निबन्ध
- अब हल्द्वानी में पहाड़ी उत्पादों के सबसे विश्वसनीय ब्रांड ‘मुनस्यारी हाउस’ की शुरुआत
- खड़कमाफी के जीवन में एक दशक से विचरते एकदंत गजराज
- क्या उत्तराखंड, पारिस्थितिक वहन क्षमता को लागू कर सकता है?
- रिंगाल आधारित शिल्प : उत्तराखण्ड का एक परम्परागत कुटीर उद्योग
- कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा
- चीड़ की छाल को कलाकृतियों का रूप दे रहा एक कलाकार
- मेरी यादों का पहाड़ : एक बहुआयामी किताब
