आई भगवान ज्यूनै छन: मातृभाषा दिवस विशेष
Posted By: Kafal Treeon:
पैली जमान में धार्मिक विश्वास आदिमूं लिजी भौत ठुल सहार हुंछी. जब लै कोई प्राकृतिक आपदा उनूंकैं दुखी और परेशान करछी लोगबाग यौ सोचि बेर अपुण मन कैं बोत्याई लिछी कि जो लै करो द्याप्तांल करौ और... Read more
अपनी समृद्ध कुमाऊनी बोलने में शर्म क्यों आती है
Posted By: Kafal Treeon:
“और डियर तू तो इंग्लैण्ड जाणी वाल छै बल” – इस ज़रा से कुमाऊनी वाक्य के विन्यास में सबसे ज़रूरी शब्द है – “बल”. यानी इस वाक्य को जो आदमी कह रहा है उसने किसी से सुना है कि सुनने वा... Read more
इस तस्वीर को ऊपर से नीचे तक गौर से देखे जाने की जरूरत है. सबसे ऊपर रेलवे की पटरी है. इसे बनाने में लगे लोहे की भी कहानी होगी. जमीन के भीतर से अयस्क निकाल कर उसे भट्टी तक पहुंचाने तक कई हाथों... Read more
Popular Posts
- आधी सदी से आंदोलनरत उत्तराखंड का सबसे बड़ा गांव
- फूल, तितली और बचपन
- पर्वतीय विकास – क्या समस्या संसाधन की नहीं शासन उपेक्षा की रही?
- अनूठी शान है कुमाऊनी महिला होली की
- धरती की 26 सेकंड वाली धड़कन: लोककथा और विज्ञान का अद्भुत संगम
- कथा दो नंदों की
- इस बदलते मौसम में दो पहाड़ी रेसिपी
- अल्मोड़े की लखौरी मिर्च
- एक गुरु की मूर्खता
- अगर आपके घर में बढ़ते बच्चे हैं तो जरूर पढ़ें एकलव्य प्रकाशन की किताबें
- प्रेम में ‘अपर्णा’ होना
- यह सिस्टम बचाता है स्विट्ज़रलैंड के पहाड़वासियों को आपदा से
- 10 डिग्री की ठंड में फुटबॉल का जोश : फोटो निबन्ध
- क्या हमें कभी मिलेंगे वो फल जो ट्रेल ने कुमाऊं में खाए?
- प्रबल प्रयास की चाह में सिडकुल और उपजी विषमता
- बर्फ ही नहीं हरियाली भी गायब हो रही है हिमालयी इलाकों से
- उत्तराखंड क्रिकेट टीम से रचा इतिहास
- उत्तराखंड बजट : स्वयं स्फूर्ति से परिपक्वता की ओर
- बर्बर इतिहास का नाम क्यों ढो रहा है ‘खूनीबढ़’
- कौन थे पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा ‘लकुलीश’?
- कैसे अस्तित्व में आया नारायण आश्रम और कौन थे नारायण स्वामी?
- घमंडी पिता और उसकी सीख
- उत्तराखंड के पेड़-पौधे: लोकज्ञान और औषधीय सत्य
- सामाजिक उत्पीड़न को सम्पूर्णता में व्यक्त करते हैं ‘जागर गीत’
- क्या चंद शासकों से पहले अल्मोड़ा में नंदादेवी का कोई मंदिर था?

