पीछे छूटता पहाड़
आम लोगों के संघर्ष, आंदोलन और उनकी शहादत से जन्मा ‘उत्तराखंड’ हमारे देश के राजनैतिक मानचित्र में एक राज्य के रुप में उभरा तो जरुर है परन्तु सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से विकसित राज्य... Read more
दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र देहरादून के तत्वाधान में शनिवार, 5 अक्दूबर, 2019 को होटल इन्द्रलोक में लोकेश ओहरी की पुस्तक ‘द किंगडम कम ‘ का लोकार्पण व चर्चा का एक कार्यक्रम आयोजित... Read more
दून पुस्तकालय एवम् शोध केन्द्र की ओर से महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती के अवसर पर विश्व के विभिन्न देशों के द्वारा गांधी जी पर जारी किये गये डाक टिकटों तथा उन पर आधारित कार्टूनों की प्रदर्... Read more
उत्तराखण्ड में स्थित अल्मोड़ा जनपद का पश्चिमी सीमावर्ती इलाका सल्ट कहलाता है. तीखे ढलान वाले रुखे-सूखे पहाड़, पानी की बेहद कमी, लखौरी मिर्च की पैदावार और पशुधन के नाम पर हष्ट-पुष्ट बैल इस इल... Read more
सिमटती पुस्तकालय संस्कृति
कई पुस्तकालय ऐसे भी हैं जहां पाठकों की संख्या तो पर्याप्त दिखाई देती है पर वे वित्तीय व अन्य संसाधनों की समस्या का सामना कर रहे हैं. इनमें प्रशिक्षित और व्यावसायिक पुस्तकालय कर्मियों का अभाव... Read more
गुमानी और गौर्दा का देशप्रेम
कुमाऊं अंचल में हिंदी की खड़ी बोली में साहित्य की परंपरा लम्बे समय तक मौखिक रही. कुमाऊं में हिंदी की खड़ी बोली में साहित्य का लिखित रूप प्रायः सन 1800 के बाद ही दिखाई देता है. (Nationalism... Read more
प्रकृति के करीब है पहाड़ का लोक पर्व – हरेला
“तुम जीते रहो और जागरूक बने रहो, हरेले का यह दिन-बार आता-जाता रहे, वंश-परिवार दूब की तरह पनपता रहे, धरती जैसा विस्तार मिले आकाश की तरह उच्चता प्राप्त हो, सिंह जैसी ताकत और सियार जैसी बुद्धि... Read more
कौसानी के कवि सुमित्रानंदन पंत -जन्मदिन पर विशेष
20 मई 1900 को जन्मे इस सुकुमार कवि के बचपन का नाम गुसांई दत्त था. स्लेटी छतों वाले पहाड़ी घर, आंगन के सामने आड़ू खुबानी के पेड़, पक्षियों का कलरव, सर्पिल पगडण्डियां, बांज, बुरांश व चीड़ के पेड़ों... Read more
फागुन को पौड़ी के बड़े याकूब का इन्तजार रहता है
होली है जो बैरभाव को जगाती है और न जात-पात को देखती है और न छोटे-बड़े का भेद समझती है. ऐसा त्यौहार भारतीय संस्कृति के अतिरिक्त कहीं नहीं दिखाई देता है. जिसमें सचमुच समाज आपसी मनमुटाव को भुला... Read more
बच्चों ने भरे थे टिहरी की होली में रंग
हिमालय की उपत्यका में बसा गढ़वाल यूं तो अपनी, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं धार्मिक आस्थाओं की वजह से अपनी गौरवमयी छवि के लिए प्रसिद्व है. वहीं यह क्षेत्र अपनी आध्यात्मिक चेतना के लिए भी याद किया ज... Read more
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