बांस के डंडों और ग्रामीणों के कन्धों पर चल रही है उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था
ऊपर जो तस्वीर आप देख रहे हैं वह उत्तराखंड के गांव बुरायला की है. चार कंधे, दो बांस की डंडियों के ऊपर लाल कम्बल में लेटी हुई महिला की यह तस्वीर उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था के विषय में अपन... Read more
लाखामंडल का महाभारतकालीन शिव मंदिर
उत्तराखण्ड के देहरादून जिले के लाखामंडल गाँव के पास ऐतिहासिक, पौराणिक और धार्मिक महत्त्व की धरोहरें हैं. ये धरोहरें उपेक्षित हैं, इसी वजह से जिस जगह पर सैलानियों का साल भर ताँता लगा रहना चाह... Read more
लाखामंडल उत्तराखण्ड के गढ़वाल मंडल के देहरादून जिले की ग्राम सभा है. यह क्षेत्र जौनसार बावर के रूप में भी अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान रखता है. लगभग 1000 की आबादी वाले इस गाँव में उत्तराखण्ड के... Read more
देहरादून से विकासनगर होते हुए एक रास्ता जौनसार बावर के लिए चल पड़ता है. इस रास्ते में उत्तराखंड के खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक पड़ता है चकराता. देवदार के घने जंगलों के बीच मनमोहक चकराता... Read more
सफ़रनामा: अतीत के रास्ते
उस साल फ़रवरी के महीने में चकराता से लोखण्डी तक गाड़ी में, और वहाँ से गाँव तक पैदल सफ़र काफ़ी रोमाँचकारी रहा. एक पिक-अप गाड़ी वाला, जो चकराता से लोखण्डी जा रहा था, बड़ी मान-मनौव्वल के बाद पीछे ख़ुल... Read more
Popular Posts
- एक गुरु की मूर्खता
- अगर आपके घर में बढ़ते बच्चे हैं तो जरूर पढ़ें एकलव्य प्रकाशन की किताबें
- प्रेम में ‘अपर्णा’ होना
- यह सिस्टम बचाता है स्विट्ज़रलैंड के पहाड़वासियों को आपदा से
- 10 डिग्री की ठंड में फुटबॉल का जोश : फोटो निबन्ध
- क्या हमें कभी मिलेंगे वो फल जो ट्रेल ने कुमाऊं में खाए?
- प्रबल प्रयास की चाह में सिडकुल और उपजी विषमता
- बर्फ ही नहीं हरियाली भी गायब हो रही है हिमालयी इलाकों से
- उत्तराखंड क्रिकेट टीम से रचा इतिहास
- उत्तराखंड बजट : स्वयं स्फूर्ति से परिपक्वता की ओर
- बर्बर इतिहास का नाम क्यों ढो रहा है ‘खूनीबढ़’
- कौन थे पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा ‘लकुलीश’?
- कैसे अस्तित्व में आया नारायण आश्रम और कौन थे नारायण स्वामी?
- घमंडी पिता और उसकी सीख
- उत्तराखंड के पेड़-पौधे: लोकज्ञान और औषधीय सत्य
- सामाजिक उत्पीड़न को सम्पूर्णता में व्यक्त करते हैं ‘जागर गीत’
- क्या चंद शासकों से पहले अल्मोड़ा में नंदादेवी का कोई मंदिर था?
- ‘काल्द’ यानी भैरव पहली बार कैसे प्रकट हुए?
- कैसा था नंदा देवी में गायब हुआ परमाणु डिवाइस?
- उपकोशा और उसके वर
- मेहनती भालू और चालाक सियार की लोककथा
- बाल, माल व पटालों का शहर : अल्मोड़ा
- आज ‘नशा नहीं-रोजगार दो आन्दोलन’ की 42वीं वर्षगांठ है
- 200 साल पुराने यात्रा-वृतांत में कुमाऊँ के ‘खस’
- तिवारी मॉडल में पहाड़ की उद्योग नीति और पलायन
