अर्बन नक्सल बनाम उदारीकरण
Posted By: Kafal Treeon:
भीमा कोरेगांव मामले में लम्बे समय बाद हाल ही में गिरफ्तार किये गए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, दलित कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों की गिरफ्तारियों के दिन से ही एक शब्द सोशल मीडिया में लगातार गूंज... Read more
पुलिस पूछती है आपके घर में इतनी किताबें क्यों है
Posted By: Kafal Treeon:
भीमा-कोरेगांव हिंसा प्रकरण के सिलसिले में हाल में गिरफ्तार किये गए कवि-राजनैतिक कार्यकर्ता वरवर राव की पुत्री से महाराष्ट्र पुलिस द्वारा पूछे गए सवालों की बानगी देखिये – “आपके दलित पति... Read more
पुणे पुलिस ने मंगलवार को देश के अनेक प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के घरों में छापा मारा और इनमें से कम से कम पांच को गिरफ्तार कर लिया. इन लोगों... Read more
Popular Posts
- उत्तराखंड बजट : स्वयं स्फूर्ति से परिपक्वता की ओर
- बर्बर इतिहास का नाम क्यों ढो रहा है ‘खूनीबढ़’
- कौन थे पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा ‘लकुलीश’?
- कैसे अस्तित्व में आया नारायण आश्रम और कौन थे नारायण स्वामी?
- घमंडी पिता और उसकी सीख
- उत्तराखंड के पेड़-पौधे: लोकज्ञान और औषधीय सत्य
- सामाजिक उत्पीड़न को सम्पूर्णता में व्यक्त करते हैं ‘जागर गीत’
- क्या चंद शासकों से पहले अल्मोड़ा में नंदादेवी का कोई मंदिर था?
- ‘काल्द’ यानी भैरव पहली बार कैसे प्रकट हुए?
- कैसा था नंदा देवी में गायब हुआ परमाणु डिवाइस?
- उपकोशा और उसके वर
- मेहनती भालू और चालाक सियार की लोककथा
- बाल, माल व पटालों का शहर : अल्मोड़ा
- आज ‘नशा नहीं-रोजगार दो आन्दोलन’ की 42वीं वर्षगांठ है
- 200 साल पुराने यात्रा-वृतांत में कुमाऊँ के ‘खस’
- तिवारी मॉडल में पहाड़ की उद्योग नीति और पलायन
- बंदर बहादुर के चोर तेंदुए को जंगल से भगाने वाली लोककथा
- 200 साल पहले कैसा था उत्तराखंड
- जब तक सरकार मानती रहेगी कि ‘पलायन’ विकास की कीमत है, पहाड़ खाली ही होते रहेंगे
- एक रोटी, तीन मुसाफ़िर : लोभ से सीख तक की लोक कथा
- तिब्बती समाज की बहुपतित्व परंपरा: एक ऐतिहासिक और सामाजिक विवेचन
- इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक स्मृति के मौन संरक्षक
- नाम ही नहीं ‘मिडिल नेम’ में भी बहुत कुछ रखा है !
- खेती की जमीन पर निर्माण की अनुमति : क्या होंगे परिणाम?
- नेपाल के रहस्यमयी झांकरी : योगी, वैद्य, तांत्रिक या ओझा?
