जब दीप जले आना, जब शाम ढले आना
जब दीप जले आना जब शाम ढले आना संदेश मिलन का भूल न जाना मेरा प्यार न बिसराना जब दीप जले आना… नित साँझ सवेरे मिलते हैं उन्हें देख के तारे खिलते हैं लेते हैं विदा एक दूजे से कहते हैं चले... Read more
पार्श्वगायक मुकेश ने हिंदी सिनेमा को एक-से-एक नायाब नगमे दिए. उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड तो कई मिले (चार बार), लेकिन राष्ट्रीय अवार्ड हासिल नहीं हुआ. एकमात्र राष्ट्रीय अवार्ड जो उनके हिस्से आया... Read more
फिल्म दिल्लगी(1978) में सट्ल ह्यूमर (Subtle humour) की श्रेष्ठ बानगी देखने को मिलती है. फिल्मकार ने, मानव- स्वभाव के सूक्ष्म मनोविज्ञान को गहरे से पकड़ा है. ऐसा प्रयोग बासु चटर्जी ही कर सकते... Read more
वासु चटर्जी की फिल्म: चमेली की शादी
कुछ फिल्में दर्शकों को आज भी बेहद रोमांचित करती हैं. इस तथ्य पर गहनता से विचार करें कि, ऐसा क्यों होता है. क्यों यह फिल्म सोंधी सी लगती है? एक मोहल्ले की कॉमन सी प्रेम-कथा, किन तत्त्वों को ल... Read more
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