चन्द्र सिंह गढ़वाली के गांव से गुजरते हुए
चौंरीखाल से चलें तो तकरीबन 5 किमी. आगे पैठाणी से आने वाली सड़क हमारी सड़क से जुड़ गयी है. ललित बताते हैं कि पैठाणी वाली सड़क भी बिट्रिश कालीन ऐतिहासिक मार्ग पौड़ी-रामनगर का ही हिस्सा है. कैन... Read more
आज भगवती प्रसाद जोशी ‘हिमवन्तवासी’ की पुण्यतिथि है
गढ़वाली और हिन्दी के कालजीवी कहानीकार स्वर्गीय भगवती प्रसाद जोशी ‘हिमवन्तवासी’ का जन्म 17 अगस्त, सन् 1927 में जोश्याणा, पैडुलस्यूं, पौड़ी (गढ़वाल) में हुआ. ‘हिमवन्तवासी’ सरकारी अधिकारी रहे औ... Read more
बचपन में मिले अभावों की एक खूबी है कि वे बच्चे को जीवन की हकीकत से मुलाकात कराने में संकोच या देरी नहीं करते. घनघोर आर्थिक अभावों में बीता बचपन जिंदगी-भर हर समय जीवनीय जिम्मेदारी का अहसास दि... Read more
डूबता शहर: टिहरी बांध बनने में शिल्पकार समाज के संघर्षों का रेखांकन करने वाला उपन्यास
साहित्यकार ‘बचन सिंह नेगी’ का मार्मिक उपन्यास ‘डूबता शहर’ “…शेरू भाई! यदि इस टिहरी को डूबना है तो ये लोग मकान क्यों बनाये जा रहे हैं. शेरू हंसा ‘चैतू! यही तो निन्यानवे का च... Read more
श्रीनगर (गढ़वाल) से जब आप चल रहे होंगे तो खिर्सू आने से पहले खिर्सू बैंड आपकी ओर मुखातिब होकर मन ही मन कहेगा कि थोड़ा रुक जाइए, जल्दी क्या है? खिर्सू तो आप पहुंच ही गए हैं. बस, एक लतड़ाग साम... Read more
प्यारी दीदी एलिजाबेथ व्हीलर को भावभीनी श्रद्धांजलि
‘‘जीवन तो मुठ्ठी में बंद रेत की तरह है, जितना कसोगे उतना ही छूटता जायेगा. होशियारी इसी में है कि जिन्दगी की सीमायें खूब फैला दो, तभी तुम जीवन को संपूर्णता में जी सकोगे. डर कर जीना तो रोज मरन... Read more
‘जिस मकान पर आपके बेटे ने ही सही, बडे़ फख्र से ‘बंसीधर पाठक ‘जिज्ञासु’ की तख़्ती टांग दी थी, उसमें देवकी पर्वतीया का खून-पसीना लगा है. यह नाम कभी आपने ही उन्हें दिया था लेकिन नेम प्लेट पर अप... Read more
आज जयानंद भारती का जन्मदिन है
स्वाधीनता संग्रामी, डोला-पालकी और आर्यसमाज आन्दोलन के अग्रणी ‘जयानंद भारती’ का जन्म ग्राम- अरकंडाई, पट्टी- साबली (बीरोंखाल), पौड़ी (गढ़वाल) में 17 अक्टूबर, 1881 में हुआ था. पिता छविलाल और मा... Read more
उत्तराखंड के इतिहास में 6 सितम्बर का महत्व
गो-बेक मेलकम हैली, भारत माता की जयहाथ में तिरंगा उठा, नारे भी गूंज उठे,भाग चला, लाट निज साथियों की रेल में,जनता-पुलिस मध्य, शेर यहां घेर लिया,वीर जयानन्द, चला पौड़ी वाली जेल में. शान्तिप्रका... Read more
दास्तान-ए-हिमालय: हिमालय को जानने-समझने की कोशिश
‘हिमालय बहुत नया पहाड़ होते हुए भी मनुष्यों और उनके देवताओं के मुक़ाबले बहुत बूढ़ा है. यह मनुष्यों की भूमि पहले है, देवभूमि बाद में, क्योंकि मनुष्यों ने ही अपने विश्वासों तथा देवी-देवताओं को... Read more
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