जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिस में बंदों को गिना करते हैं तौला नहीं करते – अल्लामा इक़बाल इसी लोकसभा चुनाव की बात है. इसी देश के एक प्रदेश में एक गांव है. कुल बहत्तर वोटों वाला.... Read more
किसने आख़िर ऐसा समाज रच डाला है
Posted By: Kafal Treeon:
हमारा समाज -वीरेन डंगवाल यह कौन नहीं चाहेगा उसको मिले प्यार यह कौन नहीं चाहेगा भोजन वस्त्र मिले यह कौन न सोचेगा हो छत सर के ऊपर बीमार पड़ें तो हो इलाज थोड़ा ढब से बेटे-बेटी को मिले ठिकाना द... Read more
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