फ़िल्मों की बहार उर्फ़ जाने कहां गए वो दिन – 3
Posted By: Kafal Treeon:
(पिछली किस्त से आगे) और नजीर हुसैन हमेशा न जाने कैसे कोई एक बेहद अमीर आदमी होता है. उसकी बीवी नहीं होती. संतान केनाम पर एक मात्र लड़की होती है – जवान और खूबसूरत. वह फिल्म के शुरू में ब... Read more
फ़िल्मों की बहार उर्फ़ जाने कहां गए वो दिन – 2
Posted By: Kafal Treeon:
(पिछली क़िस्त से आगे) सिनेमा की टिकटों के लिए खिड़की खुलने से काफी पहले ही लम्बी क़तार लग जाया करती थी. टिकट क्लर्क सरकारी बाबुओं की तरह कुछ देर से आकर आसन ग्रहण करता और बड़े इत्मीनान से टिकट... Read more
फ़िल्मों की बहार उर्फ़ जाने कहां गए वो दिन – 1
Posted By: Kafal Treeon:
जिस तरह पुराने हीरो अब हीरो नहीं रहे, एक दम ज़ीरो हो गए हैं या दादा-नाना बनकर खंखार रहे हैं, उसी तरह अपने शहर के दो सिनेमाघरों में भी एक वीरान पड़ा है तो दूसरा मॉल बन गया है. अपने को पुराने... Read more
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