बाबू का घर छोड़ना और अकेले बालक का संघर्ष – त्रिलोक सिंह कुंवर की आत्मकथा का दूसरा हिस्सा
(पिछली कड़ी – पिछली सदी के पहाड़ का दर्द जी उठता है त्रिलोक सिंह कुंवर की आत्मकथा में) जब मैं छात्रावास में ही था, अगस्त 1938 के पहले हफ़्ते में मुझे एक हरकारे द्वारा छः पन्ने का पत्र प्... Read more
बिशन गुरु की मार और ईश्वर से चवन्नी की गुजारिश
जब मैं पहली बार शहर के स्कूल पहुँचा सन 1955 तक मैंने गाँव के स्कूल में पढ़ा जो चारों ओर से ऊँची-नीची पहाड़ियों से घिरे खुले पठारनुमा शिखर पर एक तपस्वी की तरह हर वक़्त हमारी आँखों के सामने मौजूद... Read more
कलाबाज देव आनंद नैनीताल आये थे 1975 में
हिन्दी सिनेमा के सदाबहार नायक माने जाने वाले देव आनंद ने प्रसिद्धि के शिखर पर पहुँचने के बाद भी अपनी सादगी और नफासत में ज़रा भी कमी नहीं आने दी थी. फिल्मे बनाने को लेकर जैसा उत्साह उनके भीतर... Read more
अपने बचपन के गाँव को ठीक-ठीक आज न स्मरण कर पाने का एक बड़ा कारण शहर आने के बाद उत्तराखंड राज्य को लेकर चलनेवाला जन-आन्दोलन और उसमें कुछ हद तक मेरी अपनी हिस्सेदारी भी थी. (Uttarakhand poor des... Read more
सुनील दत्त नैनीताल में
सुनील दत्त (6 जून 1929-25 मई 2005) हिंदी सिनेमा के रुपहले पर्दे पर सुनील दत्त के नाम से पहचाने जाने वाले बलराज दत्त 1963 में बनी हिंदी फिल्म गुमराह की शूटिंग के सिलसिले में नैनीताल आये थे. ग... Read more
एडवर्ड जेम्स कॉर्बेट जिन्हें दुनिया जिम कॉर्बेट के नाम से जानती है, का जन्म 25 जुलाई 1875 को नैनीताल में हुआ. जिम, क्रिस्टोफर व मेरी जेन कॉर्बेट की आठवीं संतान थे. जिम का बचपन नैनीताल में बी... Read more
कुछ कर गुजरने का इरादा और उसके लिए मेहनत करने का जज्बा हो तो हर मंजिल आसान है. इसकी मिसाल पेश की है सिंगापुर में रहने वाली उत्तराखंडी मूल की अजिता बिष्ट ने. ढाई महीने तक कई चरणों में संपन्न... Read more
फल्दाकोट मध्यकाल में कुमाऊँ का एक सशक्त पहाड़ी राज्य था. फल्दाकोट राज्य के अंतर्गत पाली पछाऊं का कोसी, स्याहीदेवी, ताड़ीखेत व सल्ट का ज्यादातर हिस्सा आता था. फल्दाकोट पर कत्यूरियों की ही एक शा... Read more
मेरा और खड़कुवा का बचपन
खड़कुवा और मेरी मांओं ने हमें ऐसे ही मिट्टी लिपे फर्शों पर जन्म दिया था और हमें गाँव किनारे के उसी पोखर पर नहलाया था जहाँ आज भी औरतें अपने बच्चों को नहलाती हैं. फर्क यह आ गया है कि अब वहाँ प्... Read more
नैनीताल की मिसेज बनर्जी
‘हमारा जैसा बोलेंगा तो हिंदी कैसे बनेगा राष्ट्रभाषा, बोलो?’ ठीक तारीख याद नहीं है, 1978-79 के किसी महीने में एक दिन सुना कि मिसेज रेनू बनर्जी की लगभग छिहत्तर साल की उम्र में मृत्यु हो गई है.... Read more
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