लखनऊ का लज़ीज़ खाना-खजाना
कहो देबी, कथा कहो – 31 पिछले कड़ी कहो देबी, कथा कहो –30 जानता था, इस शहर में रहना है तो इसकी धड़कनों को सुनना होगा, तभी यह मुझे गले लगाएगा. दो-चार दिन दीप होटल में बिताने के बाद हजरतगंज के चौध... Read more
चल उड़ जा रे पंछी
कहो देबी, कथा कहो – 29 पिछली कड़ी: कहो देबी, कथा कहो – 28, पंतनगर के सन्नाटे में धांय-धांय गोलीकांड क्या हुआ कि शांत पंतनगर की फ़िजा ही बदल गई. चारों ओर निराशा का माहौल दिखाई देता. गोलीकांड के... Read more
पंतनगर के सन्नाटे में धांय-धांय
कहो देबी, कथा कहो – 28 पिछली कड़ी: कहो देबी, कथा कहो – 27, आसमान टूट पड़ा क्या नहीं था तब! वर्ष 1975 तक पंतनगर विश्वविद्यालय में 36 प्रमुख विषयों में स्नातक और 11 विषयों में स्नातकोत्तर तथा पी... Read more
आसमान टूट पड़ा
कहो देबी, कथा कहो – 27 पिछली कड़ी: कहो देबी, कथा कहो – 26 चंद्रशेखर लोहुमी को जानते हैं आप? उस साल बाज्यू फागुन आखीर तक पंतनगर में हमारे पास ही थे. उन्हें पहाड़ याद आने लगा था और वे कुछ दिन रु... Read more
कहो देबी, कथा कहो – 24 पिछली कड़ी:कहो देबी, कथा कहो – 23, कब्बू और शेरा हां, उन्हीं दिनों की बात है. एक दिन एक साथी ने कहा, “सुना है, कोई मिस्टर त्यागी आए हैं. कुलपति से मिल कर यहां किए जा रह... Read more
कब्बू और शेरा
कहो देबी, कथा कहो – 23 पिछली कड़ी: कहो देबी, कथा कहो – 22, हवा में गूंजे गीत भला कब्बू और शेरा को कैसे भूल सकता हूं. हमारे जीवन में कबूतर पहली बार वर्षों पहले सन् 1972-73 में तब आया था, जब हम... Read more
हवा में गूंजे गीत
कहो देबी, कथा कहो – 22 (पिछली कड़ी: कहो देबी, कथा कहो – 21 वे दिन, वे लोग और उन दिनों का वह पंतनगर!) वहां सब कुछ ठीक था लेकिन इतने लोगों के होने के बावज़ूद हवा में कभी गीतों के बोल नहीं गूंजते... Read more
वे दिन, वे लोग और उन दिनों का वह पंतनगर!
कहो देबी, कथा कहो – 21 (पिछली कड़ी: कहो देबी, कथा कहो – 21 – निर्माण के दिन) वे दिन, वे लोग और उन दिनों का वह पंतनगर! किसी शांत कस्बे की तरह था वह, जहां अड़ोस-पड़ोस ही नहीं, पूरे कैम्पस क... Read more
कहो देबी, कथा कहो – 20
निर्माण के दिन वर्ष भर बाद 1970 में ‘किसान भारती’ मासिक के संपादक रमेश दत्त शर्मा के विश्वविद्यालय छोड़ देने के बाद मैं और मेरा एक साथी उसका संपादन करने लगे. कुछ समय बाद ‘किसान भारती’ के संपा... Read more
कहो देबी, कथा कहो – 19
अनुशासन के वे दिन इंटरव्यू बहुत अच्छा रहा. शैक्षिक योग्यताएं और अनुभव भी काफी अच्छा था, इसलिए कमेटी ने उसे चुन लिया. कुलपति ने इंटरव्यू के बाद उसे मिलने को बुलाया और बैठा कर समझाया कि यहां उ... Read more
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