खड़कमाफी के जंगलों और आबादी के बीच पिछले लगभग एक दशक से एक परिचित छाया विचरती रही है—एकदंत गजराज. अब वह इस अंचल की लोककथाओं का जीवंत पात्र बन चुके हैं. उनके एक ही दाँत होने के पीछे भी एक लोक... Read more
कुक्कुट-हरण
Posted By: Girish Lohanion:
ललित मोहन रयाल उत्तराखण्ड सरकार की प्रशासनिक सेवा में कार्यरत ललित मोहन रयाल का लेखन अपनी चुटीली भाषा और पैनी निगाह के लिए जाना जाता है. 2018 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘खड़कमाफी की स्मृत... Read more
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