यादों में हमेशा जिंदा रहेगा अमरिया
पड़ोस के गांव गंगनौला की चाची का परिवार टनकपुर के लिए पलायन कर गया तो उन्होंने अपनी दुधारू गाय सस्ते दामों पर बेच दी, जबकि दो-ढाई साल का बछड़ा हमें मुफ्त में दे दिया. ईजा ने भी उसे ले लिया क... Read more
रक्षाबंधन या अषाढ़ी कौतिक का मेला. रिमझिम बारिश के बीच घर से निकलते तो मन मे उमंग और उत्साह रहता था. साथ ही कमाई की ललक भी. उम्मीद रहती थी कि पांच ककड़ी भी बिक जाएं तो स्कूल की फीस तो हो ही... Read more
दिल्ली में प्याज काटने के ऑफिस जाने से कहीं बढ़िया हुआ अपने गांव में खेतीबाड़ी का अपना काम
बालम उर्फ बाली के पास बैलों की एक जोड़ी थी. वह मेहनती था और व्यवहार कुशल भी, जिसके चलते वह गांव ही नहीं आसपास के गांवों का भी चहेता था. रोजगार के नाम पर उसके पास काम की कमी नहीं थी. उसके पास... Read more
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