अनजाने संपेरे, नट और जादूगर
कहो देबी, कथा कहो – 36 पिछले कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 35 “कहो देबी, कहां चले गए थे? हम तो कान लगाए हुए थे, कथा सुनने के लिए.” “क्या बताऊं, जाना पड़ा कहीं और कथा सुनाने के लिए. दिल्ली से मुंबई... Read more
मेले में अकेले
कहो देबी, कथा कहो – 35 पिछले कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 34 उन्हीं दिनों एक लंबी यात्रा पिथौरागढ़ तक की भी की. जिन वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक शर्मा जी ने मुझे बैंक के माहौल में खुद को खपाने की आत्... Read more
कहो देबी, कथा कहो – 34 पिछले कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 33 वह नई शाखाओं के खुलने और ऋण मेलों का दौर था. गांव-गांव और घर-घर तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने की चर्चाएं की जाती थीं. उस माहौल में लखन... Read more
नाटक में नाटक
कहो देबी, कथा कहो – 33 पिछले कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 32 नौकरी की आपाधापी में ही जब पता लगा कि हमारे बैंक में खेलकूद और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं की भी परंपरा है तो मन उत्साह से भर उठा. तय कि... Read more
इल्म-ओ-अदब का शहर लखनऊ
कहो देबी, कथा कहो – 32 पिछले कड़ी कहो देबी, कथा कहो –31 काम भी खाना-खज़ाना भी, यह सब तो ठीक मगर इल्म-ओ-अदब के गलियारों में भी तो पहुंचना था, जहां बातें हों, मुलाकातें हों और मेरी कलम चलती रहे.... Read more
लखनऊ का लज़ीज़ खाना-खजाना
कहो देबी, कथा कहो – 31 पिछले कड़ी कहो देबी, कथा कहो –30 जानता था, इस शहर में रहना है तो इसकी धड़कनों को सुनना होगा, तभी यह मुझे गले लगाएगा. दो-चार दिन दीप होटल में बिताने के बाद हजरतगंज के चौध... Read more
चल उड़ जा रे पंछी
कहो देबी, कथा कहो – 29 पिछली कड़ी: कहो देबी, कथा कहो – 28, पंतनगर के सन्नाटे में धांय-धांय गोलीकांड क्या हुआ कि शांत पंतनगर की फ़िजा ही बदल गई. चारों ओर निराशा का माहौल दिखाई देता. गोलीकांड के... Read more
पंतनगर के सन्नाटे में धांय-धांय
कहो देबी, कथा कहो – 28 पिछली कड़ी: कहो देबी, कथा कहो – 27, आसमान टूट पड़ा क्या नहीं था तब! वर्ष 1975 तक पंतनगर विश्वविद्यालय में 36 प्रमुख विषयों में स्नातक और 11 विषयों में स्नातकोत्तर तथा पी... Read more
आसमान टूट पड़ा
कहो देबी, कथा कहो – 27 पिछली कड़ी: कहो देबी, कथा कहो – 26 चंद्रशेखर लोहुमी को जानते हैं आप? उस साल बाज्यू फागुन आखीर तक पंतनगर में हमारे पास ही थे. उन्हें पहाड़ याद आने लगा था और वे कुछ दिन रु... Read more
चंद्रशेखर लोहुमी को जानते हैं आप?
कहो देबी, कथा कहो – 26 पिछली कड़ी:कहो देबी, कथा कहो – 25, देबी के बाज्यू आये पंतनगर अनुशासन प्रिय कुलपति जनवरी 1975 में विदा हुए. विश्वविद्यालय में उनका आखिरी दिन था. भावभीनी विदाई दी जा चुकी... Read more
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