‘चले साथ पहाड़’ अरुण कुकसाल की नई किताब
इस दुनिया को बेहतर और जीवंत बनाने की पहल करने वाला वाला निश्चित ही एक घुमक्कड़ रहा होगा. भारी भरकम बंद किताबों में ठूँसे गए गरिष्ठ ज्ञान-ध्यान से कहीं अधिक रोचकता और अपनेपन का अहसास घुमक्कड़... Read more
चुस्त-दुरुस्त सर फर. अभी यहाँ से कुछ पौंधे सारे हैं. तो अब तेज हो गई सतझड़ से वो सारे गमले उठाने में जुट जाना है. सबमें जान ठहरी. इतने द्वौ बारिश आंधी कुहरे में तो गल जायेंगे. वो नीम की खाद... Read more
पॉलीथिन बाबा का प्रभात
गाँधी जयंती पर देश को पॉलिथीन मुक्त करने का सन्देश लालकिले की प्राचीर से देते मोदी बाबा. हिमालय बचाओ पॉलिथीन हटाओ,ग्रेस मार्क्स की जगह ग्रीन मार्क्स की घोषणा करते मानव संसाधन मंत्री निशंक. अ... Read more
विभाण्डेश्वर शिव मंदिर की तस्वीरें
स्कन्द पुराण के मानस खंड में द्वाराहाट से पांच किलोमीटर दूर स्थित विभाण्डेश्वर के माहात्म्य का उल्लेख किया गया है. यह स्थल देव, गन्धर्व और यक्षों द्वारा पूजित माना गया. (Vadabhandeshwara Tem... Read more
गुलज़ार की नज़्म ‘बादल ‘- 'कल सुबह जब बारिश ने आ कर खिड़की पर दस्तक दी थी नींद में था मैं... बाहर अभी अंधेरा था ' ये बारिश नूपुर पहन के आती है. अभी-अभी दिख रहा था... Read more
Popular Posts
- उत्तराखण्ड में वन्य-जीवों का आतंक
- उनके बारे में जो सिर्फ नाम नहीं जीवन हैं
- उत्तराखण्ड के आयुष के हाथ में दिल्ली की रणजी टीम की कमान
- उत्तराखण्ड की उन्नति शर्मा ने देश का गौरव बढ़ाया, कॉमनवेल्थ -26 में जीता कांस्य
- बचपन से छीन ली गई बचपन की तस्वीर
- खसों पर हुए वैज्ञानिक अध्ययन
- वह माला के गेट पर सुबह-शाम पहरा देते मिलता
- पहाड़ो में भूस्खलन
- जर्मन की लड़ाई और रुद्रनाथ की चढाई
- हिमालय की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर प्रोफेसर पूरन चंद्र जोशी
- हैप्पी बर्थडे कॉर्बेट साहब
- 28 साल के युवा से जब टिहरी रियासत डर गई
- दुनिया में शांतिपूर्ण आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास
- गांधीजी ने दुनिया के सबसे बड़े अहिंसक आंदोलन का संचालन कैसे किया?
- भारत में आँसू गैस के गोले सबसे पहले अंग्रेज़ लाए थे
- कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल
- हरेला: प्रकृति, परंपरा और विज्ञान का अद्भुत संगम
- हरेले के रंग में पहाड़ : फोटो निबन्ध
- अब हल्द्वानी में पहाड़ी उत्पादों के सबसे विश्वसनीय ब्रांड ‘मुनस्यारी हाउस’ की शुरुआत
- खड़कमाफी के जीवन में एक दशक से विचरते एकदंत गजराज
- क्या उत्तराखंड, पारिस्थितिक वहन क्षमता को लागू कर सकता है?
- रिंगाल आधारित शिल्प : उत्तराखण्ड का एक परम्परागत कुटीर उद्योग
- कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा
- चीड़ की छाल को कलाकृतियों का रूप दे रहा एक कलाकार
- मेरी यादों का पहाड़ : एक बहुआयामी किताब
