कुमाऊं के बहुत से क्षेत्रों में सातों-आठों सबसे महत्वपूर्ण पर्व है. सातों-आठों कुमाऊं का एक ऐसा लोकपर्व है जिसमें स्थानीय लोग मां पार्वती को अपनी दीदी और भगवान शिव को भिना के रूप में पूजते हैं. सातूं-आठूं भी सातों-आठों का ही एक उच्चारण है. सूं, धान, तिल, मक्का, मडुवा, भट आदि – से बनायीं गयी मानव आकृतियों को गमार या गवांर कहा जाता है.
(Saton-Athon Festival Uttarakhand 2021)
भाद्रपद माह की पंचमी से शुरु होने वाला यह लोकपर्व इसी माह की अष्टमी को समाप्त होता है. अष्टमी के दिन गंवरा के विवाह और गौने के गीत समवेत गाये जाते हैं और नृत्य किया जाता है. गौरा महेश्वर बाहर खुले आंगन में ले आए जाते हैं. दोनों को हिलोरी खिलाई जाती है:
हिलोरी बाला हिलोरी, बाला महेश्वर हिलोरी.
पूरा लेख यहां देखें: पहाड़ों में सातों-आठों की बहार आ गयी है
सासू यो मेरो बालो देखी दिया
मैं तो जानइ छ बालो देखी दिया
तुम म्यार बाला कें धोई दिया, चुपड़ी दिया,
म्यार बाला कें खवाइ दिया
हिलोरी बाला हिलोरी, बाला महेश्वर.
इस वर्ष भी कुमाऊं के विभिन्न अंचलों में सातों-आठों का पर्व मनाया गया. पिथौरागढ़ जिले में सातों आठों पर्व की कुछ तस्वीरें देखिये. सभी तस्वीरें संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन में कार्य कर रही संस्था भाव ताल नाट्य अकादमी द्वारा उपलब्ध कराई गयी हैं.
(Saton-Athon Festival Uttarakhand 2021)
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