नैनीताल की रामलीला का इतिहास
नैनीताल में मल्लीताल की रामलीला की शुरूआत सन 1918 में राम सेवक सभा की स्थापना के साथ ही शुरू हो गयी थी. शुरूआती दौर में यह रामलीला खुले मैदान में होती थी जिसे आलू पड़ाव कहा जाता था पर 1928 में चेतराम साह ठुलघरिया ने कमिश्नर से कह के रामलीला स्टेज की स्थापना करवाई और उसके बाद से रामलीला स्टेज में रामलीला का मंचन होने लगा.
यहां की रामलीला में पारसी थियेटर का प्रभाव देखा जा सकता है. उसी से प्रभावित होकर यहां के कलाकारों ने रामलीला का मंचन शुरू किया. शुरू-शुरू में होली गायकों ने इसमें हिस्सेदारी की जिस कारण रामलीला में संगीत का प्रभाव आने लगा और फिर इसे संगीतमय बनाया जाने लगा.
यहां की रामलीला के बारे में एक रोचक बात और है. कहा जाता है कि अपने अल्मोड़ा प्रवास के दौरान जब पं. उदय शंकर ने यहां की रामलीला देखी तो वो इससे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस पर एक न्त्य नाटिका भी बनायी जिसका उन्होंने नैनीताल में भी मंचन किया.
इस रामलीला को अब लगभग सौ वर्ष हो चुके हैं और आज भी यहां कि रामलीला पारंपरिक तरीके से ही की जाती है हालांकि थोड़ा-बहुत आधुनिकता का असर अब दिखने लगा है.
प्रस्तुत हैं नैनीताल की रामलीला की कुछ तस्वीरें.
विनीता यशस्वी
विनीता यशस्वी नैनीताल में रहती हैं. यात्रा और फोटोग्राफी की शौकीन विनीता यशस्वी पिछले एक दशक से नैनीताल समाचार से जुड़ी हैं.
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