Featured

अल्मोड़ा का नंदा देवी डोला – फोटो निबंध

उत्तराखंड की आराध्य देवी नंदा देवी का अल्मोड़ा का नंदा देवी मेला लोगों को एक सूत्र में पिरोता है इस साल के नंदा देवी मेले के अन्तिम दिन कल शाम 27 सितंबर 2023 को अल्मोड़ा में नंदा देवी का डोला निकाला गया जिसमें अल्मोड़ा और आसपास के गांवों और कस्बों से जनसैलाब उमड़ पड़ा.
(Nanda Devi Almora Photos 2023)

इस डोले के दर्शन के लिए लोग अल्मोड़ा की पुरानी बाजार में इंतजार करते हैं और उनमें से कई लोग तो पिछले कई सालों से हर साल इस दिन और डोले का इंतजार करते हैं और नंदा-सुनंदा देवियों की इस भव्य शोभा यात्रा में शामिल होते हैं.

नंदा-सुनंदा मां के डोले के पास आते ही ये लोग फूल और अक्षत डोले पर चढ़ाते हैं, बाज़ार में महिलाऐं अपने घरों से निकल कर डोले की आरती भी करती हैं.
(Nanda Devi Almora Photos 2023)

नंदा देवी मंदिर लाला बाज़ार से शुरू होकर डोला ड्योडी पोखर के बाद चौक बाज़ार, कचहरी बाज़ार, खजांची मोहल्ला, गंगोला मोहल्ला, थाना बाज़ार, पलटन बाजार और फिर अल्मोड़ा कैंट स्थित नौले तक जाता है जहां नंदा सुनंदा देवियों की मूर्तियों को विसर्जित किया जाता है.
(Nanda Devi Almora Photos 2023)

देखिए अबके बरस अल्मोड़ा के नंदा देवी के डोले की तस्वीरें. सभी तस्वीरें काफल ट्री अनन्य साथी जयमित्र सिंह बिष्ट ने ली हैं –

फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट

जयमित्र सिंह बिष्ट

अल्मोड़ा के जयमित्र बेहतरीन फोटोग्राफर होने के साथ साथ तमाम तरह की एडवेंचर गतिविधियों में मुब्तिला रहते हैं. उनका प्रतिष्ठान अल्मोड़ा किताबघर शहर के बुद्धिजीवियों का प्रिय अड्डा है. काफल ट्री के अन्तरंग सहयोगी.

इसे भी पढ़ें: अल्मोड़ा नंदा देवी मेले में सांस्कृतिक परिधानों में बच्चे : फोटो निबंध

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

1 week ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

2 weeks ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

2 weeks ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

2 weeks ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

2 weeks ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

2 weeks ago