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कत्यूर: उत्तराखण्ड का सबसे वैभवशाली साम्राज्य

उत्तराखण्ड के कुमाऊं मंडल के जिला बागेश्वर में गोमती और सरयू नदी के बीच फैली घाटी को कत्यूर घाटी के नाम से जाना जाता है. यह घाटी 142 वर्ग किमी के इलाके को खुद में समेटती है, इसमें 189 गाँव शामिल हैं. कत्यूरी शासकों की राजधानी बैजनाथ हुआ करती थी. यहाँ आज भी रणचूलाकोट, तैलीहाट, सेलीहाट, गढ़सेर और झाली-माली के रूप में इस राजधानी के खंडहर मौजूद हैं.

कहा जाता है कि मूलतः इस राजधानी की स्थापना जोशीमठ में की गयी थी. बाद में नागपंथी नर सिंह के कहने पर इसे बैजनाथ स्थानांतरित किया गया, जिसे तब कर्तपुर, कर्तिकेयपुर कहा जाता था.

अल्मोड़ा जिले की बौरारो पट्टी में कौसानी से आगे हरछीना से कत्यूर की शुरुआत होती है. गोमती नदी के प्रवाह क्षेत्र में बसा यह परगना तीन पट्टियों में बंटा हुआ है— मल्ला, बिचला और तल्ला कत्यूर.

मल्ला कत्यूर

गढ़वाल के चमोली जिले के के बधाण परगने के पूर्व में गोमती की बहाव के ऊपरी हिस्से में स्थित है मल्ला कत्यूर. इसका प्रमुख केंद्र बैजनाथ है जो कभी कत्यूरों की राजधानी हुआ करता था.

बिचला कत्यूर

वल्ला गिवाड़ व पल्ला गिवाड़ पट्टी के पश्चिम में स्थित है बिचला कत्यूर. सोमेश्वर से कौसानी, बैजनाथ को जाने वाला मार्ग इसी से होकर गुजरता है.

तल्ला कत्यूर

बौरारो व खरही पट्टी के दक्षिण में पड़ता है तल्ला कत्यूर. यह गोमती, सरयू और लहोर की निचली घाटी में है. बागेश्वर इसी का हिस्सा है.

कत्यूर वंश का सबसे शक्तिशाली राजा ललितशूरदेव था जिसका शासन काली कुमाऊँ तक फैला हुआ था. कहते हैं कि इसने यहाँ की सभी पुरातन जनजातियों— खश, किरात, नाग, दैत्य, दानव, चाण्डाल आदि को अपने अधीन कर लिया था.

कत्यूरी शासक मूलतः खश प्रजाति से ताल्लुक त्रखते थे. अभिलेखों से पता चलता है कि कत्यूरी बड़े पराक्रमी, कला प्रेमी और विद्वानों का आदर करने वाले हुआ करते थे. इनका राज्य इस पर्वतीय क्षेत्र का स्वर्णिम काल हुआ करता था.

(उत्तराखण्ड ज्ञानकोष, प्रो. डी. डी. शर्मा के आधार पर)    

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Sudhir Kumar

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  • It is called a Goldern Period of Uttarakhand. It is said that Katyuris built the Baijnath Temple in just one night in around 10th Century. Studying the architecture of all the temples in Garhwal i.e Kedarnath, Badrinath ,Joshimath, Champawat,Jageshwar, Bageshwar, Almora, Thal and many parts of Kumoun and India, it gives an idea abt the methods they used to built it & those r still intact. But reading history, the sources are different in different books. So remains a mystery till now.

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