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‘सांस्कृतिक संक्रमण’ पर प्रो. डी. डी. शर्मा का तीस साल पुराना लेख

आज से 60-70 वर्ष पूर्व हमारी पीढ़ी के लोगों ने कुमाऊँ की पावन भूमि के जिस सांस्कृतिक वातावरण में प्रथम…

3 years ago

पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ की कहानी जल्लाद

प्रातः आठ साढ़े आठ बजे का समय था. रात को किसी पारसी कम्पनी का कोई रद्दी तमाशा अपने पैसे वसूल…

3 years ago

आजकल मनाया जा रहा है मंगसीर बग्वाल

दीपावली के ठीक एक माह बाद जो दीपावली आती है उसका नाम है मंगसीर बग्वाल. इसे उत्तराखण्ड के गढ़वाल क्षेत्र में…

3 years ago

नवम्बर की गुलाबी धूप और माल्टा

देश और दुनिया के लोगों के दिमाग में माल्टा शब्द सुनकर यूरोपीय देश का ध्यान आता है. पर एक असल…

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ज्ञानरंजन की कहानी ‘अनुभव’

1970 की गर्मियों का प्रारंभ था. गंगा के मैदान में गर्मियों के बारे में सभी जानते हैं. यहाँ पर मौसम…

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पिथौरागढ़ में फुटबाल का स्वर्णिम इतिहास

पिथौरागढ़ में वर्ष भर फुटबॉल खेली जाती थी. लेकिन दूर्नामेंट का आयोजन देवसिंह मैदान में ही होता और खेल का…

3 years ago

जो परदेश रहता है उसी की इज़्ज़त होती है

पहाड़ से मैदान की ओर जाने पर लगता है जैसे सीढ़ी से उतरते हुए चौक में आ रहे हों. कोटद्वार…

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जुगल किशोर पेटशाली की पुस्तकों का विमोचन

दून पुस्तकालय एवम् शोध केंद्र की ओर से लोक संस्कृतिविद् जुगल किशोर पेटशाली की कुमाऊं की लोकगाथाओं पर आधारित पुस्तक…

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कुमाऊनी लोक साहित्य में संस्कार गीत

आप काफल ट्री की आर्थिक मदद कर सकते हैं           संस्कार गीत संस्कार सम्बन्धी लोक गीत…

3 years ago

जीवन और जीविका की सुनहरी राह बनाते विनीता-अरविंद

कोरोना महामारी ने समाज के बहुसंख्यक लोगों की जीवन-दिशा को बदला है. जीवन में अचानक आये इस संकट ने लोगों…

3 years ago