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अपने खून से महात्मा गांधी को ख़त लिखकर डांडी मार्च में शामिल होने वाले उत्तराखंडी खड्ग बहादुर

डांडी-सत्याग्रह के दिन. देहरादून से गाँधी जी को एक खत मिला. पत्र मामूली स्याही से नहीं, भेजने वाले ने अपने…

6 years ago

किसी को तो रहना है : सब कुछ बयां कर दिया है पलायन से जुड़ी इस कहानी ने

जिस वक्त हम गाँव पहुँचे, धूप चोटियों पर फैलने के बाद उतरते-उतरते पहाड़ियों के खोलों में बैठने लगी थी. हवा…

6 years ago

सिकंदर की तृष्णा और दार्शनिक फकीर डायोजनीज

सिकंदर यानी अलेक्जेंडर तृतीय के बारे में तो हम सबने सुना ही है कि वह मेसीडोनिया यानी मकदूनिया, जो कि…

6 years ago

‘साह’ जाति-नाम पर कुछ नोट्स

राजीव लोचन साह की ओर शायद मैं आकर्षित नहीं होता अगर वह उसी सरनेम वाला नहीं होता, जो मेरी बुआ…

6 years ago

बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता था उत्तराखंड में गंगा दशहरा का त्यौहार

भारतीय संस्कृति में नदियों को सर्वोच्च सत्ता के रुप में आसीन करने और उसे देवत्व स्वरुप प्रदान करने की अलौकिक…

6 years ago

कल है गंगा दशहरा

ज्येष्ठ शुक्ल की  दशमी  स्कंदपुराण में  गंगावतरण की  तिथि कही गयी जिसे गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है. ऋग्वेद…

6 years ago

अल्मोड़े के आनसिंह जिन्होंने संस्कृत में कर्मकाण्ड की शुद्ध पुस्तकें छपवाकर उत्तराखंड के दुर्गम स्थानों तक पहुंचाई

'आज इना तक सरकूँगा, कल भिन्हार तक, परसों सिलोर महादेव. अगले दिन भवड़ा, फिर रानीखेत. आठवें दिन अल्मोड़ा पहुँच पाऊँगा.'…

6 years ago

अपनी समृद्ध कुमाऊनी बोलने में शर्म क्यों आती है

“और डियर तू तो इंग्लैण्ड जाणी वाल छै बल” - इस ज़रा से कुमाऊनी वाक्य के विन्यास में सबसे ज़रूरी…

6 years ago

द्वितीय विश्व युद्ध में अल्मोड़ा के किशनराम के साहस का अजब किस्सा

रणनीति के अनुसार, हमारा बिग्रेड उत्तरी पहाड़ियों पर हमला करके, जहाँ इटली की सेना थी, पीछे से जाकर मौनेस्ट्री हिल…

6 years ago

आमा के हाथ वाले लिटुवा के स्वाद की अब दुआ ही की जा सकती है

आजकल आत्मनिर्भरता का शोर बहुत है लेकिन जब तक आमा थी यह शोर नहीं था. इसके बावजूद न सिर्फ आमा…

6 years ago