कैसे बनती हैं बरेली की मशहूर सेवइयां
बरेली के मठ लक्ष्मीपुर में इरफ़ान अली पिछले १५ सालों से अपने दो भाइयों नाज़िम और नौशाद के साथ मुक़द्दस माह-ए-रमज़ान और सावन में रोजादारों और भक्तों के लिए सेवइयां बनाते हैं. वे मैदे से इन से... Read more
नैनीताल में थियेटर का इतिहास करीब एक शताब्दी पुराना है और नैनीताल नगर ने लम्बे समय से रंगमंच के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई हुई है. ललित तिवारी, निर्मल पांडे, सुदर्शन जुयाल, सुनीता रजवार... Read more
बाड़ाहाट से मंगसीर बग्वाल की कुछ तस्वीरें
उत्तराखण्ड के गढ़वाल मंडल के सीमांत जनपद उत्तरकाशी के टिहरी, नौगांव, पुरोला. मोरी, जनपद के थत्युड, देहरादून के कालसी, चकराता, हिमाचल के शिमला, कुल्लू, सिरमौर में मैदानी इलाकों में मनायी जाने... Read more
मुनस्यारी से संगीत की ‘बूंद’
इसी साल बरसात के मौसम की बात है मुनस्यारी को जाने वाली सड़कें पूरे दस दिनों तक बंद थी. आप और हमारे लिये जो जीवन कठिन होता है वह मुनस्यारी के लिये दैनिक जीवन है. हर एक साल बरसात में मुनस्यारी... Read more
मैदानी क्षेत्र में मनायी जाने वाली दीपावली के ठीक एक माह बाद उत्तराखण्ड के गढ़वाल मंडल में जौनपुर और जौनसार क्षेत्र में परंपरागत त्यौहार मनाया जाता है जिसे मंगसीर बग्वाल कहा जाता है. पिछले सा... Read more
गंगोलीहाट का हाट कालिका मंदिर
हाट कालिका मंदिर -सुमन जोशी पूरे कुमाऊं में हाट कालिका के नाम से विख्यात गंगोलीहाट के महाकाली मंदिर की कहानी भी उसकी ख्याति के अनुरूप है. पांच हजार साल पूर्व लिखे गए स्कंद पुराण के मानसखंड म... Read more
छुरमल देवता की कथा
लोकदेवता छुरमल को सोर-पिथौरागढ़ के उत्तरी क्षेत्रों में पूजा जाता है. लोकपरम्परा के अनुसार छुरमल के पिता का नाम कालसिण था. दोनों पिता-पुत्र की कहानी एक दूसरे से गहरे जुड़ी हुई है. छुरमल का मुख... Read more
रानीखेत के करगेत से कानपुर तक खिंची एक पुरानी डोर
तीस के दशक में कभी रानीखेत तहसील के एक छोटे से गाँव करगेत से निकले पाँच भाइयों ने जब जीवन में अपने लिए कुछ सपनों के साथ शहर का रूख किया तो कानपुर का यही घर उनका ठिकाना बना जिसे उन्होंने बड़ी... Read more
बैजनाथ के शिव मंदिर की तस्वीरें
बैजनाथ का मन्दिर समूह उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की गरुड़ तहसील में गरुड़ से कुल 2 किलोमीटर की दूरी पर है. गोमती नदी के किनारे पर स्थित यह बैजनाथ मन्दिर (Baijnath Temple ) लगभग एक हज़ार वर्ष पह... Read more
चटोरे जवाईं की लोककथा
मुझे अक्सर अपने दादा, दादी, चाचियाँ, माँ बहुत याद आते हैं. आप कहेंगे इसमें नई बात क्या है. अपनी जिंदगी में हम जिन लोगों को खो देते है वो तो सभी को बहुत याद आते हैं. मेरी बात नई है या नहीं ये... Read more


























