असौज का नाम आते ही पहाड़ में बुतकार लोगों की बाजुएं फड़कने लगती हैं और कामचोरों की सास मर जाती है. पहाड़ में कृषि का कार्य मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है इसलिए सबसे ज्यादा आफत महिल... Read more
भँवर एक प्रेम कहानी, हाल ही में प्रकाशित उपन्यास है. उत्तराखण्ड के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक, अनिल रतूड़ीजी, इस कृति के लेखक हैं. साहित्य, संगीत और संस्कृति के प्रति लेखक का अनुराग उनके से... Read more
बैरासकुण्ड की यादें
गाँव के अपने घर से निकल कर मंदिर की ओर का रास्ता लेता हूँ . वापिस देहरादून लौटने के पहले एक बार अपने ईष्टदेव के दर्शनों के लिए. मगर एक और लालच खींच लिए जा रहा था. बचपन के अपने पाँवों के कितन... Read more
विवाह एक उत्सव है. विवाह एक परम्परा, एक संस्कार है. उच्च हिमालय के रहवासी शौका समाज या जोहारी समाज की शुभ विवाह की कुछ यादें भूली-विसरी स्मृतियों से. (Wedding Customs and Traditions in... Read more
अल्मोड़ा के पास ही एक गांव था जिसका नाम था अन्यारीकोट. अन्यारीकोट के लोग भूत-भिसौंड़े को नियंत्रित करने में माहिर माने जाते थे. अन्यारिकोट के लोगों के लोगों के विषय में तरह-तरह के किस्से कहे... Read more
आज बछेंद्री पाल का जन्मदिन है
निखालिस पहाड़ी बछेंद्री पाल संसार की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला ‘माउंट एवरेस्ट’ को फतह करने वाली दुनिया की 5वीं और प्रथम भारतीय महिला हैं. इन्होंने यह कारनामा 23 मई, 1984 के दिन 1 बजकर 7 मिनट... Read more
“उठो जागो लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत.” स्वामी विवेकानन्द के ये विचार अल्मोड़ा के लक्ष्य सेन पर एकदम फिट बैठते हैं, ऐसा लगता है जैसे स्वामी जी लक्ष्य से स्वयं ये वाक्य कह रहें हों... Read more
कुमाऊं में ब्राह्मणों के प्रकार
कुमाऊं की जातिगत परम्परा के अंतर्गत ब्राह्मणों के भीतर भी वर्ग किये गये हैं. इस वर्गीकरण के आधार पर कुमाऊं में तीन तरह के ब्राह्मण देखने को मिलते हैं. इन तीनों ही ब्राह्मणों का आपस में विवाह... Read more
मां की ठोस यादों से भरा कुमाऊनी गीत “पलना”
अपने जीवन में स्त्री एक साथ कई किरदारों से होकर गुजरती है जिसमें मां का किरदार सबसे मयाला है. एक स्त्री अपने बच्चे को अपना सबकुछ दे देना चाहती है फिर कैसी भी परिस्थितियां हो. पहाड़ की स्त्री... Read more
चाय से जुड़े अफसाने, चाय दिवस के बहाने
चाय हमारे हिन्दुस्तानी समाज में कुछ इस तरह रच-बस चुकी है कि वह अब केवल राष्ट्रीय पेय ही नहीं रहा, बल्कि चाय के बहाने बड़े बड़े काम चुटकियों में हल करने का जरिया भी है. बाजार से लेकर दफ्तर तक... Read more


























