सुबह सबेरे ही आज लखनऊ से मित्र मोहन उपाध्याय ने दिल उदास करने वाली खबर दी कि दीवान नगरकोटी नहीं रहे.मित्रों से मिली जानकारी के आधार पर वे पिछले 4-5 माहों से कैंसर की असाध्य बीमारी से चुपचाप... Read more
चालाक सियार: पहाड़ी लोककथा
एक बार जंगल में तेंदुए, भेड़िए, बिल्ली, चूहे और सियार ने मिलकर एक बेहद तेज भागने वाले मोटे हिरन को मारने की योजना बनाई. सियार बोला- जब हिरन सो रहा हो उस समय हमारा दोस्त चूहा जाकर हिरन के खुर... Read more
पुस्तक के परिचय में रत्ना एम. सुदर्शन लिखती हैं- यह किताब उन लोगों को आश्चर्यचकित करेगी जो मेरे पिता को जानते थे. आई.सी.एस. अधिकारी रहे और ‘पद्म-विभूषण’ से सम्मानित स्व. बी डी पाण्डे की पिछल... Read more
घसियारिनों का चालान
वीडियो हेलंग गांव का है. चमोली जिले के जोशीमठ विकासखंड की उर्गम गांव का एक बेहद सुंदर गांव है हेलंग. वीडियो में हेलंग गांव की महिलाओं और पुलिस व सीआईएसएफ के बीच एक झड़प का है. झड़प घास को ले... Read more
सावन की शुरुआत में हरेले का गीत
पिछले कुछ सालों से उत्तराखण्ड के युवाओं द्वारा लोक संगीत को नए कलेवर में पेश करने का चलन देखने में आया है. इन कोशिशों में गाने को भौंडा बनाने के बजाय उनकी पहाड़ी आत्मा को बचाये-बनाये रखने के... Read more
आज सुबह पहाड़ में लम्बी उम्र के आशीर्वचन कहे जायेंगे और घरों में पकवानों की सुंगध बिखरेगी. पिछले दिनों घर में जमाये हरेला को आज सुबह ईश्वर के सामने काटा जायेगा. परिवार की सबसे बड़ी महिला सभी... Read more
सियारों के झुण्ड ने तय किया कि अबकी शिकार में हाथी को मारा जायेगा और छक कर मौज उड़ाई जायेगी. सियारों का पूरा झुण्ड हाथी के पास गया. सियारों के सरदार ने हाथी से कहा- मेरे प्यारे मालिक हमें जं... Read more
भुट्टे का मैक्सिको की पहाड़ियों से भारत का सफ़र
हरी थी मन भरी थी लेकिन इतनी महंगी थी कि खरीदी नहीं. पचास रूपए का एक भुट्टा. शिमला में था. भूख भी लगी थी. थका-मांदा मालरोड पार करके लिफ्ट से नीचे सड़क पर आया. सामने ही भुट्टे वाला कोयलों पर भ... Read more
सियार और बाघिन की शादी : पहाड़ी लोककथा
पहाड़ सियारों के मूल घर हुआ करते थे और बाघ रहते थे तराई में. एक बार दोनों के सरदारों में तय हुआ कि दोनों अपनी-अपनी जगह बदल लें. सियार रहेंगे तराई में और बाघ रहेंगे पहाड़ों में. सियार तभी तरा... Read more
अट्ठारहवीं शताब्दी में ब्रिटिश भारत के कुमाऊँ-गढ़वाल मंडलों में जातिवादी उत्पीड़न अपने चरम पर था. मुंशी हरिप्रसाद टम्टा का नाम उन राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं में प्रमुखता से लिया जाना चाहि... Read more


























