कत्यूर शासकों ने जोशीमठ से राजधानी क्यों बदली
इस बात के साक्ष्य मिलते हैं कि उत्तराखंड क्षेत्र के पहले शासक कत्युरों की पहली राजधानी जोशीमठ में थी. यह भी माना जाता है कि जोशीमठ के मंदिर का निर्माण भी कत्युरों के आदिपुरुष वासुदेव ने ही क... Read more
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सत्ता में रहें या न रहें पर ख़बरों में हमेशा बने रहते हैं. कायदे से देखा जाये तो हरीश रावत को कोई भी आम चुनाव जीते हुए अब दो दशक होने को हैं इसके बाव... Read more
मेरे स्कूल का सुनहरा साल
पचास साल हो गये हैं, मेरे स्कूल की स्थापना के. स्वर्ण जयंती साल है 2022. पचास साल पहले 22 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रदेश, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री श्री कमलापति त्रिपाठी जी... Read more
कुमाऊं क्षेत्र में अब सिर ढकने की परम्परा पूरी तरह समाप्त हो चुकी है. कम लोग ही जानते हैं एक समय ऐसा भी था जब पूरे कुमाऊं क्षेत्र में सिर ढकने की परम्परा हुआ करती थी. सिर ढकने की इस परम्परा... Read more
पिछली कड़ी यहां पढ़ें: छिपलाकोट अन्तर्यात्रा: सारा जमाना ले के साथ चले पिथौरागढ़ महाविद्यालय से शाम चार बजे के आस-पास बाहर निकलते ही मिल गये डॉ. मदन चंद्र भट्ट. इतिहास के विभागाध्यक्ष. अब मे... Read more
उत्तराखंड में भादो अष्टमी और सातों-आठों का लोकपर्व
इन दिनों कुमाऊं की धरती पग-पग पर माता भवानी की डलिया लेकर इन्हीं गीतों और संगीत के रंग में डूब रही है. चाँदनी रात में गाए जाने वाले ‘झोड़ा’ गीतों की तर्ज पर ही रात-रातभर चलने वाल... Read more
सातों-आठों से जुड़ी गौरा-महेश्वर की कथा
भादो के महीने की सप्तमी-अष्टमी तिथि को कुमाऊं के गांवों में सातों-आठों पर्व की धूम होती है, बच्चे नए कपड़े पहन मस्ती करते, गांव भर में यहां-वहां दौड़ते हैं, औरतें नई साड़ियां पहनती हैं, पिछौ... Read more
अनुपमा का प्रेम
ग्यारह वर्ष की आयु से ही अनुपमा उपन्यास पढ़-पढ़कर मष्तिष्क को एकदम बिगाड़ बैठी थी. वह समझती थी, मनुष्य के हृदय में जितना प्रेम, जितनी माधुरी, जितनी शोभा, जितना सौंदर्य, जितनी तृष्णा है, सब छ... Read more
लोकपर्व सातों-आठों पर कही जाने वाली कथा
कुमाऊं में सातों-आठों की खूब धूम रहती है. कुमाऊं क्षेत्र में एक बड़े समाज द्वारा सातों-आठों का पर्व मुख्य पर्व के रूप में मनाया जाता है. अलग-अलग क्षेत्र के लोग अपनी-अपनी मान्यताओं के अनुसार... Read more
सातों-आठों में आज घर आयेंगी गौरा दीदी
पहाड़ में आज उत्सव का माहौल है. सुबह से ही घर की साफ-सफाई लिपा-पोती का जोर है क्योंकि आज गौरा दीदी अपने मायके आने वाली हैं. लोक की सबसे बड़ी विशेषता ही यह है कि यहां के आराध्य भी मानवीय रितो... Read more


























