क्या पहाड़ एक भी सैनिक स्कूल के काबिल नहीं
उत्तराखंड राज्य की स्थापना एक पर्वतीय राज्य की संकल्पना के साथ हुई. इसके तराई भाबर के मैदानी इलाकों को पहाड़ों की आधार भूमि कहते हुये जोड़ा गया. उत्तराखंड राज्य बनने के समय भी पहाड़ के कई स्... Read more
कोट भ्रामरी के नंदादेवी मेले में पहाड़ के लोग
पहाड़ में बसने वाले लोग खुद में पूरा पहाड़ जीते हैं, उनके चेहरे बताते हैं वो क्या हैं, उनकी हंसी खुद में पूरा जीवन जीती है उनको नाचते गाते देखना ज़िंदगी के सबसे सुखद पलों में से एक होता है.(... Read more
छुरमल मंदिर कण्डाराछीना में भव्य रांख की तस्वीरें
कुमाऊं के लोकदेवताओं में छुरमल का नाम प्रथम पंक्ति के लोकदेवताओं में लिया जाता है. छुरमल कालसिण और हयूंला के पुत्र माने जाते हैं पिता-पुत्र की कथा अलग-अलग प्रकरणों के साथ पूरे कुमाऊँ में कही... Read more
यह 1932 का बरस था और सितम्बर महीने की 6 तारीख. आज पौड़ी में लाट मैलकम का दरबार लगा था. कड़े आदेश थे कहीं भी कोई ऐसी घटना न घटे जो लाट साहब कि शान में गुस्ताखी लगे. छोटे से बने मंच से लाट साह... Read more
इस वर्ष मोस्टामानू मेले की तस्वीरें
कुमाऊं के पर्वतीय जिलों में आज भी मेले पूरी रवायत के साथ मनाये जाते हैं. पर्वतीय जिलों के मुख्यालय के आस-पास होने वाले इन मेलों का स्वरूप आज भले ही बदला हुआ लगता है लेकिन इन मेलों में आज ठेठ... Read more
अल्मोड़े से नंदादेवी मेले की एक्सक्लूसिव तस्वीरें
इन दिनों पहाड़ नंदामय हैं. अल्मोड़ा और नैनीताल में मां नंदा की भव्यता देखते बनती है. अल्मोड़ा नंदा देवी मेले में दूर-दूर से लोग आकर शामिल होते हैं. उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने व... Read more
मोस्टामानू का मेला
हर साल ऋषि पंचमी के दिन पिथौरागढ़ में वर्षा के देवता मोस्टामानू के मंदिर परिसर में एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. मेले के दिन लोक देवता का डोला खुकदे के जागर काल से शुरू होता है. मंदिर... Read more
नैनीताल में आज से नंदादेवी महोत्सव
आज से अगले एक सप्ताह नैनीताल में नंदादेवी महोत्सव चलेगा. नैनीताल की वादियों में इन दिनों, भाद्रपद महिने की पंचमी से शुरु होने वाले इस महोत्सव की मुश्क महसूस की जा सकती है. 1 सितम्बर से शुरु... Read more
खटीमा गोलीकांड के 28 बरस
1994 के साल सितम्बर महीने की पहली सुबह थी. आज खटीमा में सरकार की गुंडागर्दी के विरोध में एक प्रदर्शन होना था. खटीमा में करीब दस हजार लोग एक जुलूस में शामिल थे. पूर्व सैनिक, छात्र, महिलायें औ... Read more
चालक बनढ़ाडु की कहानी- कुमाऊनी लोककथा
एकबार एक चालाक बनढ़ाडु दूध के बर्तन में मुंडी डालकर दूध पी रहा था. अचानक घर के मालिक के आने की आवाज़ सुनकर बनढ़ाडु ने हड़बड़ी में मुंडी बाहर निकालनी चाही पर वह तो बर्तन के अंदर ही फस गयी थी.... Read more


























