25 बरस के हुये आज कुमाऊं के दो जिले
साल 1997 तक कुमाऊं मंडल में अल्मोड़ा एक प्रमुख जिला था. एक तरफ जहां पूरे पर्वतीय क्षेत्र को अलग राज्य बनाने की मांग ने जोर पकड़ा था वहीं दूसरी ओर बागेश्वर और चम्पावत क्षेत्र के लोग चाहते थे... Read more
एक दिन का मेहमान – कहानी
उसने अपना सूटकेस दरवाजे के आगे रख दिया. घंटी का बटन दबाया और प्रतीक्षा करने लगा. मकान चुप था. कोई हलचल नहीं – एक क्षण के लिए भ्रम हुआ कि घर में कोई नहीं है और वह खाली मकान के आगे खड़ा... Read more
यह तस्वीर पिथौरागढ़ जिला अस्पताल की है. तस्वीर में एक पिता अपने मृत बच्चे को गोद में लेकर जिला अस्पताल पिथौरागढ़ के बाहर बैठा है. आरोप है कि जिला अस्पताल की लापरवाही के चलते बच्चे की मृत्यु... Read more
कुमाऊनी बालगीत गाते नर्सरी के बच्चे
पिछले कुछ दिनों से कुमाऊनी बोली में बालगीत गाते बच्चों का यह वीडियो सोशियल मीडिया पर वायरल है. वीडियो पिथौरागढ़ जिले के एक निजी स्कूल न्यू बियर शिबा स्कूल का है. वीडियो में स्कूल की अध्यापिक... Read more
आज गोविन्द बल्लभ पन्त का जन्मदिन है. यह बात बड़ी रोचक है गोविन्द बल्लभ पन्त के जन्म की तारीख 10 सितम्बर न होकर 30 अगस्त है. पहाड़ी गते या हिन्दी पंचांग के अनुसार उनका जन्म अनंत चुतुर्दशी के... Read more
बात ‘गलता लोहा’ से शुरू करते हैं, जो शेखर जोशी जी की अपेक्षाकृत कम चर्चित कहानी है. पहाड़ के एक गांव में दो सहपाठी हैं- धनराम और मोहन. धनराम लोहार का बेटा है जो कुमाऊं में शिल्पकार यानी अछूत... Read more
हिमालय और उसके जन-जीवन की गहन पड़ताल है ‘दावानल’
अब ताला क्या लगाना!तो क्या कोठरी खुली ही छोड़ दे?असमंजस में वह बंद दरवाजे के सामने खड़ा रह गया. (पृष्ठ-9) ‘दावानल’ उपन्यास की उक्त शुरूआती लाइनों में व्यक्त लेखक नवीन जोशी का असमंजस व्यवहारि... Read more
पहाड़ में ताल-चाल-खाल बनाम अमृत सरोवर
उत्तराखंड में पारम्परिक रूप से बरसात के पानी को रोकने के लिए बनाए तालाबों को चाल -खाल कहते हैं. अमूमन दो पहाड़ियों के बीच की ढलान जिस स्थान पर मिलती है वहां स्थानीय स्तर पर इन्हें बनाया जाता... Read more
राग गधईया बिलावल, बहुत बड़ा ख़्याल
फिर वही! क्या स्वतंत्रता का अधिकार बस नाम के लिये दिया गया है संविधान में? शुरू किया नहीं कि टोका-टाकी चालू. बात वही, जो हर बार कही जाती है. श्रीमतीजी फोन पर दीपचन्दी ताल लगा कर कुछ रियाज़ क... Read more
कहो केदार क्या हाल हैं : एक यात्रा वृतांत
पहली बार केदारनाथ गया तो वहां के हाल देख पर्यावणविद सुंदरलाल बहुगुणाजी का कहा याद आया कि ग्लेशियर धीरे-धीरे मरुस्थल में बदल रहे हैं. नए उत्तराखण्ड को प्रकृति और पर्यावरण की कोई परवाह नहीं. न... Read more


























