पिथौरागढ़ में फुटबाल का स्वर्णिम इतिहास
पिथौरागढ़ में वर्ष भर फुटबॉल खेली जाती थी. लेकिन दूर्नामेंट का आयोजन देवसिंह मैदान में ही होता और खेल का सीजन मध्य जुलाई से सितम्बर अंत तक रहता. देवसिंह मालदार ट्रॉफी, जनरल करियप्पा सील्ड, म... Read more
जो परदेश रहता है उसी की इज़्ज़त होती है
पहाड़ से मैदान की ओर जाने पर लगता है जैसे सीढ़ी से उतरते हुए चौक में आ रहे हों. कोटद्वार रेलवे स्टेशन की सीढ़ियों में पटर-पटर उतरते हुए मन में अक्सर यही बात आती है. करीब बीस साल पहले की बात... Read more
जुगल किशोर पेटशाली की पुस्तकों का विमोचन
दून पुस्तकालय एवम् शोध केंद्र की ओर से लोक संस्कृतिविद् जुगल किशोर पेटशाली की कुमाऊं की लोकगाथाओं पर आधारित पुस्तक ‘मेरे नाटक‘ तथा चार अन्य पुस्तकों ‘जी रया जागि रया‘,‘विभूति योग‘,‘गंगनाथ-गी... Read more
कुमाऊनी लोक साहित्य में संस्कार गीत
आप काफल ट्री की आर्थिक मदद कर सकते हैं संस्कार गीत संस्कार सम्बन्धी लोक गीत महिलाओं द्वारा गाये जाते हैं. यह प्रत्येक शुभ अवसर पर बच्चे के जन्म से लेकर यज्ञोपवीत, विवाह आदि जीवन से... Read more
जीवन और जीविका की सुनहरी राह बनाते विनीता-अरविंद
कोरोना महामारी ने समाज के बहुसंख्यक लोगों की जीवन-दिशा को बदला है. जीवन में अचानक आये इस संकट ने लोगों को हताश-निराश तो किया परन्तु उनके मन-मस्तिष्क में अन्तर्निहित शक्तियों और हुनर को उभारा... Read more
उत्तराखंड में खेती
खेती के इतिहास का सभ्यता के विकास के साथ अटूट सम्बन्ध है. इसी के आधार पर मनुष्य अपने समाज की संरचना कर पाया. परन्तु दुर्भाग्यवश इतिहासकारों का ध्यान भारतीय खेती के इतिहास, विशेषकर हिमालयी खे... Read more
बेहद ख़ास है कुमाऊनी रायता
रैत यानी कि रायता. कुमाऊं में इसका ख़ास महत्व है. जिस तरह मैदानों में पनीर की किसी सब्जी या दाल मखनी के बगैर कोई भी थाली अधूरी है, उसी तरह कुमाऊं की थाली भी रैत के बिना अधूरी है. कुमाऊनी राय... Read more
कुमाऊनी भाषा में एक लोकप्रिय लोककथा
भौत पैलिये बात छु. एक गौं में एक बुड़ और एक बुड़ी रौंछी. उ द्वियनै में हइ-निहई कजी लागिये रोनेर भै. नानतिन उनर क्वे छी नै. एक चेलि छी वीक ले भौत पैली ब्या है गोछी.(Folklore in Kumaoni Langua... Read more
यह उत्तराखंड की एक आम तस्वीर है
तस्वीर में कुछ ग्रामीण एक गर्भवती महिला को अस्पताल को ले जा रहे हैं. इससे पहले दो दिन तक महिला प्रसव पीड़ा से तड़पती रही. जब गांव वालों ने महिला की मदद करनी चाही तो गर्भवती महिला को अस्पताल... Read more
सर्वप्रथम पाली पछाऊँ शब्द की व्युत्पत्ति कत्यूरी शासन काल में हुई. उत्तराखण्ड में कत्यूरी शासनकाल के दौरान कत्यूरी शासकों की एक शाखा यहाँ आकर बस गई और लखनपुर कोट अपनी राजधानी बनाई. इसकी स्था... Read more


























