इतिहास का विषय बन चुकी हैं उत्तराखण्ड के पर्वतीय अंचलों की पारम्परिक पोशाकें
विश्व के अन्य भागों की भाँति ही उत्तराखण्ड की संस्कृति भी अपने आप में समृद्ध रही है, परन्तु आधुनिकता की चकाचौंध में दिन-प्रतिदिन इसकी चमक धूमिल होती जा रही है. शिक्षा और जागरुकता का प्रभाव य... Read more
पहाड़ियों की अंग्रेजी टैट है
दिन भर की थकी हारी आमा जैसे ही सूरज डूबने के बाद घर में घुसी तो देखा किशन अंदर चारपाई पर पसरा हुआ है. आमा किशन पर झल्लाते हुए बोली: “किशन्या! कि डी-टोप दिरा त्वेलि ये बे टैम में?” (किशन! क्य... Read more
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree पहाड़ी अपने सरल व्यवहार के लिए जाने जाते हैं. उनका सरल व्यहार उनकी जीवन-शैली में भी खूब झलकता है फिर चाहे उनका खानपान हो या... Read more
आखिर पवित्र नदियों के संगम की ऐसी दुर्गति क्यों?
मैं जौलजीबी के झूला पुल से गुजरते हुए नेपाल की सीमा से जुड़े हुए गांव की ओर बढ़ रही हूं, तो दो दोनों तरफ की सांझी संस्कृति को बेहद करीब से देख रही हूं. नदी के एक तरफ नेपाली गीत, नृत्य एवम् स... Read more
व्यासऋकी (व्यास ऋषि) पूजा परंपरा, कल और आज
परिचय- ‘‘नमोस्तु ते व्यास विशालबुद्धे, फुल्लारविन्दायतपत्रनेत्र:. येन त्वया भारततैलपूर्ण: प्रज्ज्वालितो ज्ञानमयप्रदीप:..’’ अर्थात:- जिन्होंने महाभारत रूपी ज्ञान के दीप को प्रज्वलित किया ऐसे... Read more
उत्तराखण्ड में टोपी पहनने का चलन कब शुरू हुआ?
सर्द मौसम है कभी बादल सूर्य को आगोश में ले लेते हैं कभी सूरज देवता बादलों को पछाड़कर धूप फेंकते यहां वहां नज़र आ जाते हैं, कभी पेड़ों के झुरमुट में, कभी आसमान में प्रचंड चमकते, कभी खेतों के प... Read more
उत्तराखण्ड में थिएटर में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है. ‘काफल ट्री फाउंडेशन’ और ‘द शक्ति ऑनसेम्बल’ द्वारा हल्द्वानी में 12 दिसंबर 2022 से 15 दिन की थिएटर वर्कशॉप का आयोजन किया... Read more
‘बेरीनाग शब्द ‘बेड़ीनाग’ का अपभ्रंश है. बेड़ीनाग का अर्थ लिपटे हुए नाग से है. समझा जाता है कि अंग्रेजी में ‘इ’ शब्द का उच्चारण न होने के कारण इसे बीईआरआईएनएजी (... Read more
क्या हो अगर जिस बैग में दुल्हन के लाखों के जेवरात रखे हों ऐन फेरों के मौके पर वे गुम हो जाएँ. जब दुल्हन का पूरा परिवार ग़मगीन होकर सोच रहा हो कि अब संकट को कैसे हल करें, तभी खोये हुए जेवर और... Read more
7वीं तक पढ़े ढोल वादक सोहन लाल को डी.लिट की उपाधि
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय ने उत्तराखंड के प्रसिद्ध ढोल वादक सोहन लाल को डॉक्टर ऑफ लेटर्स (डी.लिट) की उपाधि से नवाजा. ढोल वादक सोहन लाल के संगीत की थाप देश ही नहीं विद... Read more


























