पहाड़ी ऐसे मनाते हैं बंसत पंचमी
उत्तराखंड में बंसत पंचमी का दिन सबसे पवित्र दिनों में एक माना गया है. सिर पंचमी के नाम से जाना जाने वाला यह पहाड़ियों का एक पवित्र पर्व है. इस दिन पहाड़ी अपनी स्थानीय नदियों में जाकर स्नान क... Read more
गणतंत्र दिवस परेड में दिखेगा छोलिया नृत्य
इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में उत्तराखण्ड की झांकी ख़ास होगी. उत्तराखंड राज्य की झांकी का नाम है मानसखण्ड. झांकी के आगे और बीच के भाग में कार्बेट न... Read more
दो गज जमीन
दो बहने थी. बड़ी का कस्बे में एक सौदागर से विवाह हुआ था. छोटी देहात में किसान के घर ब्याह थी. बड़ी का अपनी छोटी बहन के यहां आना हुआ. काम निबटकार दोनों जनी बैठीं तो बातों का सूत चल पड़ा. बड़ी... Read more
क्या सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु देहरादून में हुई
कई सारे लोग आज भी यह मानते हैं कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु 1945 की विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी. भारत के आजाद होने के बाद कई दशकों तक सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु पर बात होती रही. भ... Read more
टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑल वैदर रोड पर बिताई दो रातें
सितम्बर का महीना था. मौसम का मिज़ाज इस कदर बदला हुआ था कि चौमासे में बारिश ना के बराबर हुई. सितम्बर मध्य में मौसम विभाग ने पहाड़ों में 3 दिन बारिश का अलर्ट जारी किया. पहाड़ों में बारिश होना... Read more
सुभाष चन्द्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को आज़ाद हिन्द सरकार का गठन किया था. 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान देश को अंग्रेजों की गुलामी से निजात दिलाने के उद्देश्य से इस सरकार की स्थापना स... Read more
एक महान सपने को साकार होते देखने की चित्र गाथा है ‘परेड ग्राउण्ड टू लैंसडाउन चौक‘
सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में हिमालयी अध्ययन पर संकेन्द्रित दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र का प्रार्दुभाव 16 मार्च, 2006 को एक स्वायत्तशासी संस्था के रुप में देहरादून हुआ. इसके लिए माध्यमिक... Read more
जनवरी का महीना था ज़मीन से उठता कुहासा मेरे घर के आसपास विस्तीर्ण फैले हुए गन्ने के खेतों पर एक वितान सा बुनकर मेरे भीतर न जाने कहीं सहमे हुए बच्चे की तरह बुझा-बुझा सा बैठ जाया करता था. (Spr... Read more
जोशीमठ के पहाड़
इतने सीधे खड़े रहते हैंकि अब गिरे कि तबगिरते नहीं बर्फ़ गिरती है उन परअंधेरे मे ये बर्फ़ नहीं दिखतीपहाड़ अपने से ऊँचे लगते हैंडराते हैं अपने पास बुलाते हैं दिन में ऐसे दिखते हैंकोई सफ़ेद दाढ... Read more
जोशीमठ की पूरी कहानी
गढ़वाल हिमालय का गजेटियर लिखने वाले अंग्रेज़ आईसीएस अफसर एचजी वॉल्टन ने 1910 के जिस जोशीमठ का ज़िक्र किया है, वह थोड़े से मकानों, रैनबसेरों, मंदिरों और चौरस पत्थरों से बनाए गए नगर चौक वाला ए... Read more


























