बरखा-बहार पर सिनेमाई गीत
जल स्रोत और हरियाली, कुदरत की ऐसी नियामते हैं जो आँखों को सुकून देती हैं और मन को खुशी. पेड़- पौधे, पशु-पक्षी हों, चाहे मनुष्य, सभी बरसा से आनंदित होते हैं. इस खास मौसम में समूची कुदरत झूमने... Read more
जन्मान्ध हरदा सूरदास गाते हुए जब-जब भावावेश के चरम पर पहुँचते थे, सफ़ेद पड़ चुकी पुतलियों वाली उनकी ज्योतिहीन आँखों के कोरों से आंसू बहना शुरू हो जाते. पूरे चाँद की उस जादुई रात नैनीताल के ए... Read more
कबूतरी देवी – (1945 से 07 जुलाई 2018) आज कबूतरी देवी जिंदा होती तो? बीमारी की वजह से अस्पताल के चक्कर काट रही होतीं, उनके परिजन मिन्नतें कर रहे होते. संस्कृति विभाग से मिलने वाली मामूल... Read more
19 दिनों से किताबों और शिक्षकों के लिये धरना दे रहे हैं पिथौरागढ़ के छात्रों की कहानी
पिथौरागढ़ महाविद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों और पुस्तकों की मांग को लेकर धरना पिछले 19 दिनों से जारी है. सेमेस्टर परीक्षाओं के बीच भी युवा छात्र भरपूर ऊर्जा से धरना स्थल पर बैठे हैं और धरना स... Read more
कुछ दिन तो बसो मेरी आँखों में
(पोस्ट को रुचिता तिवारी की आवाज़ में सुनने के लिए प्लेयर पर क्लिक करें) मेलोडेलिशियस-10 ये ऑल इंडिया रेडियो नहीं है. ये ज़ेहन की आवाज़ है. काउंट डाउन नहीं है ये कोई. हारमोनियम की ‘कीज़... Read more
आठ करोड़ पौधे लगाने वाले पिथौरागढ़ के पर्यावरणविद कुंवर दामोदर सिंह राठौर
2016 में मई महीने में डीडीहाट के आस-पास के जंगलों में आग लगती है. भनौरा गांव में रहने वाला 91 बरस का एक बूढ़ा अपनी लाठी के सहारे निकल पड़ता है जंगल की ओर आग बुझाने. आग बुझाने के प्रयास में उसे... Read more
चलो सखी पर्वत है आएं
चलो सखी पर्वत है आएं सब आपस में चंदा करकैंडीजल की गाड़ी में भर कैंदेहरी छू भज आएं चलो सखी पर्वत है आएं काउ नाव में बैठ-बाठ कैंमाल रोड की काउ लाट पैंस्लीवलेस पे टैटू गाँठ कैंसेल्फ़ी... Read more
अल्मोड़ा का सामूहिक संध्यावंदन और विदेशी लाल परी
कॉटेज नंबर सी 09, जिसमें अल्मोड़ा के आरंभिक दिनों में प्रवास का मौका मिला था, के अगल-बगल, आगे-पीछे की तरफ कुल जमा तेरह चौदह कॉटेज और भी थीं. जिनमें काफी कुछ आबाद थीं.... Read more
उत्तराखण्ड देवभूमि में लगभग 2000 मीटर तक की ऊंचाई तक चिर पाइन यानी भारतीय चीड़ के जंगल मिल जाएंगे, ऊंचे-ऊंचे दरख़्त नोंकदार पत्तियां और भूरे लाल रंग के तने के साथ. आप को बताऊं ये केवल चीड़ क... Read more
पहाड़ी जाड़े की सौग़ात: सना हुआ नींबू
पहाड़ी नींबू करीब करीब बड़े दशहरी आम जितने बड़े होते हैं. माल्टा मुसम्मी और संतरे के बीच का एक बेहद रसीला फल होता है. ताज़ी पहाड़ी मूली में ज़रा भी तीखापन नहीं होता. भांग के बीजों में नशे जै... Read more


























