चोरी करना बुरी बात है पर यह बात ककड़ी चोरी पर भी लागू हो, कहा नहीं जा सकता. इसलिये तो हमारे पहाड़ में कहा जाता है, ककड़ी चोरी करने वाले को किसी भी प्रकार की गालियां नहीं लगती हैं. पहाड़ में... Read more
काली नदी में सबसे ज्यादा जलीय योगदान करने वाली सरमूल से निकलने वाली सरयू और डेबरा श्रेणी भटकोट से निकलने वाली गोमती नदी बागेश्वर में सरयू के रूप में एकाकार हो जाती है. बागेश्वर से कपकोट की त... Read more
अर्जन्या: पहाड़ के लोक से जुड़ी कहानी
यकायक मुझे सब कुछ रहस्यमय लगने लगा. घर-आंगन. पेड़-पौधे. लोग. यहां तक कि अपने इजा (मां) और बौज्यू (पिता) भी. मैं घर की देहरी पर बैठा था और मेरी नजर आंगन पर थी. यह आंगन जैसा आंगन नहीं था. जगह-... Read more
अंततः हल्द्वानी का हिमालय
एक: मेरे गाँव से हिमालय हिमालय के बारे में मैंने बड़े नाटकीय अंदाज़ में जाना. हिमालय के बीच ही पैदा हुआ था, इसलिए उसके बारे में अलग से जानने की, खासकर किताबी ढंग से जानने की इच्छा का दबाव कभ... Read more
अभिनेत्री रूप दुर्गापाल के साथ देवभूमि दर्शन
अभिनेत्री रूप दुर्गापाल अल्मोड़ा की रहने वाली हैं. उनका पहाड़ प्रेम भी जगजाहिर है. मायानगरी के अपने व्यस्त समय से वे उत्तराखण्ड के पहाड़ों में रमने का वक़्त निकाल ही लेती हैं. इस दौरान अल्मो... Read more
देवता भी चले गए लेकिन गुरु ने गांव नहीं छोड़ा
आज रेवती का श्राद्ध है. हीरा गुरु दरवाजे पर बैठकर पूरन और भास्कर दत्त जी का इंतजार करते हुए बहुत देर से सामने डांड़े को ताक रहे थे. घर के आगे सीढ़ीनुमा बंजर खेत बहुत गहराई तक फैले हैं. डांड़... Read more
कल से शुरू होंगे पितृपक्ष के श्राद्ध
भाद्रपद महीने के समाप्त होने पर आश्विन मास की शुरुआत होती है. परम्परा है कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष मनाया जाए और श्राद्ध-तर्पण इत्यादि से उनकी स्मृति का सम्मान किया जाए. (Pitr... Read more
रूपकुंड के रहस्य से जुड़ी मां भगवती की कहानी
कन्नौज के राजा और उसके राज्य पर देवी भगवती का कोप था. अच्छा धान बोने पर सोला उगता. लोग जब अच्छे गेहूँ की उपज की आशा लगाए बैठे थे, खेतों में गोबरी पैदा हुई. चने की फसल जब लोग काटने गए तो उन्ह... Read more
डायजनिस और भूखा शेर- इस कहानी से सीख लें
प्राचीन यूनान में डायजनिस नाम का एक दास था. वह अपनी दासता से मुक्त होना चाहता था. मुक्त होने के लिए एक दिन वह राजा के सिपाहियों को चकमा दे जंगल की ओर भाग निकला. सिपाहियों को जब इसका पता चला,... Read more
उम्मीद-भरी प्रतीक्षा के बाद निराशा की जो अथाह थकान होती है, उसी को लेकर टूटी डाल की मानिंद-थकी-माँदी काकी लौट गई थीं. उनका जाना निश्चित था. हम कोशिश करते तब भी वे रुकनेवाली नहीं थीं. किसी ने... Read more


























