त’आरुफ़ : कोतवाल का हुक्का
ज़ाहिर सी बात है ‘कोतवाल का हुक्का’ शीर्षक कहानी-संग्रह में प्रतिनिधि कहानी तो ‘कोतवाल का हुक्का’ ही होगी. इसके अलावा संग्रह में कुछ लंबी कहानियाँ हैं तो बहुत सी लघु... Read more
गांव पर लटका ताला
‘प्रधानी का चुनाव लड़ा जाए?’ एक सुबह बिल्कुल अचानक पुष्कर ने पूछा. ‘बहुत अच्छा रहेगा,’ कविता खुश हुई. ‘सही में?’ ‘बिल्कुल! जानते हो, कई बार सोचती हूं कि गांव में रहने तो हम आ गए लेकिन कर क्य... Read more
सफ़ेद सांप जिसने एक सेवक की जिन्दगी बदल दी- लोककथा
बहुत पुरानी बात है. एक राजा था, जो अपनी बुद्धि और ज्ञान के लिए अपने ही राज्य में नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों में भी बड़ा प्रसिद्ध था. संसार में ऐसी कोई वस्तु नहीं थी, जिसका उसे ज्ञान न हो. कोई... Read more
धारचूला की बेटी सुमन कुटियाल दताल की एवेरेस्ट विजय
“ऊपर की ओर देखा तो सामने सागरमाथा की चोटी थी. मन में हिलोर सी उठी कि दौड़ कर जाऊं और सागरमाथा मां के चरण छू उनसे आशीर्वाद लूँ. पूछूँ उनसे कि माँ अब तक तुम कहाँ थी? आज अभी वह दिन आया जब... Read more
बरसों पुराना है पालक और पहाड़ियों का साथ
सोचा, चौलाई के दाम आसमान पर हैं तो चलो कोई और हरी सब्जी खोजते हैं जो हमारी जेब पर भारी न पड़े. देखा, चौलाई का बिरादर हरा-भरा पालक बाजार में आ चुका है. इससे बेहतर भला क्या हो सकता है?(Palak K... Read more
कोटगाड़ी भगवती मंदिर की तस्वीरें
कामनापूर्ति मैया कोटगाड़ी भगवती का मंदिर थल कोटमन्या रोड पर स्थित पांखू के पास स्थित है. कोटगाड़ी मंदिर में भगवती सात्विक वैष्णवी रूप में पूजी जाती है. न्याय की देवी अधिष्ठात्री के... Read more
नुकीली ठुड्डी वाले राजा की कहानी
एक राजा की एक बेहद सुंदर पर घमंडी और बदमिजाज बेटी थी. उसे कोई भी आदमी पसंद न आता. राजा उसकी शादी विवाह करना चाहता पर वह हर लड़के में कोई-न-कोई कमी निकालकर प्रस्ताव ठुकरा देती. राजा उसकी बदमि... Read more
लोक कथा : सोने की बत्तख
एक गांव में रहने वाले निर्धन दंपत्ति के तीन बेटे थे. बड़ा बेटा माँ का प्यारा था तो मंझला पिता का दुलारा. लेकिन छोटा बेटा घर में किसी को प्रिय नहीं था, सब उसे उपेक्षा के भाव से देखा करते थे.... Read more
सियार का फैसला- लोक कथा
एक सियार था. एक बार वह अपने शिकार की तलाश में निकला. उसने दूर से देखा, एक आदमी एक बाघ के आगे-आगे चल रहा है. उसे बात समझ न आई और वह छुप-छुपकर उनका पीछा करने लगा. तभी उसे आदमी की आवाज़ सुनाई प... Read more
नववर्ष के दिन बोया जाता है ‘हरेला’
माना जाता है कि चैत्र प्रतिपदा से नये साल की शुरुआत होती है आज के दिन से ही नवरात्रि भी होती है. पहाड़ों में आज के दिन उपवास रखा जाता है और कुछ जगहों पर आज के दिन हरेला भी बोया जाता है. हरेल... Read more


























