उत्तराखंड बजट : स्वयं स्फूर्ति से परिपक्वता की ओर
लेखे के नये लाल बैग से निकला निर्मल बजट उत्साह संवर्धन नीति का पिटारा लाया है. ऐसे समय में जब आर्थिक शीत युद्ध की कमान तेजी से दुनिया में भारत की ओर तान दी गयीं हों. वाहय असंतुलन से निबटते ह... Read more
तिवारी मॉडल में पहाड़ की उद्योग नीति और पलायन
पिछली कड़ी : जब तक सरकार मानती रहेगी कि ‘पलायन’ विकास की कीमत है, पहाड़ खाली ही होते रहेंगे उत्तराखंड की आर्थिक नीतियों में पलायन को अंतरसंरचना की कमी व शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के... Read more
जब तक सरकार मानती रहेगी कि ‘पलायन’ विकास की कीमत है, पहाड़ खाली ही होते रहेंगे
पिछली कड़ी : उत्तराखंड विकास नीतियों का असमंजस उत्तराखंड में पलायन मात्र रोजगार का ही संकट नहीं रहा, यह तो पिछले दो सौ सालों से हो रही हलचल से उपजीबहुआयामी संरचनात्मक विफलता दिखा... Read more
उत्तराखंड सरकार ने कृषि भूमि पर निर्माण व भूमि उपयोग संबंधित पूर्ववर्ती नीति में फेरबदल किया है. यह निर्णय लिया गया कि अब कृषि भूमि पर पर्यटन/रिसोर्ट आदि के निर्माण को भूमि उपयोग परिवर्तन के... Read more
उत्तराखंड विकास नीतियों का असमंजस
पिछली कड़ी यहां पढ़ें : उत्तराखंड में सेवा क्षेत्र का विकास व रणनीतियाँ उत्तराखंड की स्थापना वर्ष 2000 में हुई, जहाँ राज्य के आर्थिक विकास हेतु किये जाने वाले प्रयासों में तदर्थ नीतियों का स... Read more
उत्तराखंड में सेवा क्षेत्र का विकास व रणनीतियाँ
उत्तराखंड की भौगोलिक, सांस्कृतिक व पर्यावरणीय विशेषताएं इसे पारम्परिक व आधुनिक दोनों प्रकार की सेवाओं के लिए अत्यंत संभावनाशील राज्य बनाती हैं. यहां धार्मिक, आध्यात्मिक, प्राकृतिक व रोमांचका... Read more
उत्तराखंड में वित्तीय अनुशासन की नई दिशा
उत्तराखंड जैसे संसाधन सीमित हिमालयी राज्य के लिए वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता केवल प्रशासनिक विषय नहीं बल्कि विकास का मूल आधार है. अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (ऐ जे एन आई ए... Read more
कुमाउनी शब्द सम्पदा की विपुलता, विविधता और सामर्थ्य के प्रसंग में लब्ध प्रतिष्ठित भाषा शास्त्रियों का मत है कि कभी-कभी तो हिंदी या अन्य भाषाएं इसका मुकाबला नहीं कर पाती. ऐसे में यह सन्दर्भ प... Read more
‘मनमोहन सिंह’ उम्मीदों से भरा सफर :
1991 से देश में आर्थिक क्रांति हुई जो निःसंदेह 1947 में नेहरू द्वारा की गई राजनीतिक क्रांति से कहीं अधिक असरदार थी. अस्सी के दशक में देश आतंरिक अस्थायित्व यानी बेरोजगारी और मुद्रा स्फीति के... Read more
ऐसे बीज बिछा रे, सुख चैन उगे दुख दर्द मिटे
पिछली कड़ी : डी एस बी के अतीत में ‘मैं’ डी एस बी मेरे लिए इसलिए भी खास बना रहा कि मेरा बचपन इसी की परिधि में बीता. वहीं घर था सरकारी, अंग्रेजों के समय का बना. टीन की छत, भीतर की तरफ लकड़ी लगी... Read more


























