कला साहित्य

तब देख बहारें होली की

अठारहवीं शताब्दी के आगरा के शायर नजीर अकबराबादी (Nazeer Akbarabadi 1740-1830) ने अपने आसपास के साधारण जीवन पर तमाम कविताएँ…

7 years ago

धूमिल की कविता ‘रोटी और संसद’

रोटी और संसद - सुदामा पाण्डेय 'धूमिल' एक आदमी रोटी बेलता है एक आदमी रोटी खाता है एक तीसरा आदमी…

7 years ago

ललित मोहन रयाल की नई किताब

कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ [ललित मोहन रयाल (Lalit Mohan Rayal) कृत ‘अथश्री प्रयाग कथा’ के बहाने प्रयाग के ‘बहबूद के…

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लीलाधर जगूड़ी को वर्ष-2018 का व्यास सम्मान

प्रसिद्ध कवि लीलाधर जगूड़ी जी को उनकी काव्य रचना ‘जितने लोग उतना प्रेम’ के लिए अखिल भारतीय बिड़ला फाउंडेशन का…

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भोंदू जी की सर्दियाँ

भोंदू जी की सर्दियाँ - वीरेन डंगवाल (Viren Dangwal) आ गई हरी सब्जियों की बहार पराठे मूली के, मिर्च, नीबू…

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नैनीताल के अजाने इतिहास से निकली एक और अनोखी कहानी

नैनीताल के फांसी गधेरे से जुड़ी अनेक किंवदंतियों-कहावतों-किस्सों के पसमंजर में गूंथकर रचा गया है इस अद्भुत कथा को. इतिहास,…

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रंग डारि दियौ हो अलबेलिन में – पहाड़ी होली पर गिर्दा का आलेख

काफल ट्री के नियमित सहयोगी चंद्रशेखर तिवारी ने 'उत्तराखण्ड होली के लोक रंग' नाम से एक महत्वपूर्ण पुस्तक का सम्पादन…

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बम का व्यास

इजराइल के कवि येहूदा आमीखाई (Yehuda Amichai 1900-2000) बीसवीं शताब्दी के सबसे चर्चित लेखकों में रहे. युद्ध की विभीषिका और…

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धरती मिट्टी का ढेर नहीं है अबे गधे

वीरेन डंगवाल (Viren Dangwal) के बारे में मशहूर कवि/सम्पादक/आलोचक विष्णु खरे ने लिखा था: "लेकिन इससे बड़ी ग़लती कोई नहीं…

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साझा कलम : फालतू पुराण

"आ गए अच्छे दिन? आज तो पलंग के नीचे से निकालकर ड्राइंग रूम तक आ गए, क्या बात है !"-…

7 years ago