Categories: Featured

इंडोनेशिया में शुरू हुआ एशियाड 2018

इन्डोनेशिया की राजधानी जकार्ता स्थित गिलोरा बंग कार्नो स्टेडियम में 18 अगस्त की शाम एक रंगारंग कार्यक्रम के साथ एशियन खेल के 18वें संस्करण की शुरुआत हो चुकी है. यह खेल इंडोनेशिया के दो शहरों जकार्ता और पालेमबंग में आयोजित किये जा रहे है. एशियाई खेलों के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब खेलों का आयोजन दो शहरों में किया जा रहा है. 18 अगस्त से 2 सितंबर के मध्य होने वाले इन खेलों में एशिया के 45 देशों के लगभग 11 हजार खिलाड़ी भाग लेंगे.

एशियाई खेल के उदघाटन कार्यक्रम में इंडोनीशियाई कलाकार अंगीन, रायसा, तुलुस, पुत्री अयू, फातिन, कामसेन, वाया आदि ने प्रस्तुतियां दी इस शानदार रंगारंग कार्यक्रम में इंडोनेशिया ने अपनी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की. एशियाई खेलों के इस संस्करण का विषय ‘फील द एनर्जी ऑफ़ एशिया’ है. एशियन गेम्स 2018 के तीन शुभंकर भिन-भिन, अतुंग और काका हैं. ‘भिन-भिन’ एक पक्षी, ‘अतुंग’ एक प्रकार हिरन और ‘काका’ एक सींग वाला गैंडा है. यह तीनों शुभंकर इंडोनेशिया के पूर्वी, पश्चिमी और मध्य क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.

802 भारतीयों का काफिला भी एशियाई खेल में शामिल हुआ है. जूनियर विश्व चैम्पियन और राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता एथलीट नीरज चोपड़ा द्वारा भारतीय दल की अगुवाई की गई. नीरज चोपड़ा भाला फेंक एथलीट हैं. उद्घाटन समारोह में यह पहला मौका था जब ईरान और ईराक के दल की ध्वजवाहक महिला खिलाड़ी बनी.

इंडोनेशिया दूसरी बार एशियाई खेलों का आयोजन कर रहा है. इससे पूर्व 1962 में इंडोनेशिया में एशियाई खेलों का आयोजन किया गया था. भारतीय फुटबाल टीम ने इसी एशियाई खेल में स्वर्ण पदक भी जीता था.

एशियाई खेल ओलम्पिक के बाद विश्व का सबसे प्रसिद्ध आयोजन है जिसे हर चार वर्ष बाद किया जाता है. पहले एशियाई खेल का आयोजन 1951 में भारत में ही किया गया था. 1982 से एशियन गेम्स का आयोजन ओलम्पिक संघ की निगरानी में किया जाता है. अब तक 9 देशों के इसका आयोजन किया जा चुका है. भारत और जापान ही केवल ऐसे देश हैं जिन्होंने अब तक प्रत्येक एशियाई खेल में स्वर्ण पदक जीता है.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

3 days ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

4 days ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

4 days ago

कुमाऊँ की खड़ी होली

इन दिनों उत्तराखंड के कुमाऊँ में होली की धूम है. जगह-जगह खड़ी होली और बैठकी…

1 week ago

आधी सदी से आंदोलनरत उत्तराखंड का सबसे बड़ा गांव

बात उन दिनों की है, जब महात्मा गांधी जब देश भर में घूमकर और लिखकर…

2 weeks ago

फूल, तितली और बचपन

बचपन की दुनिया इस असल दुनिया से कई गुना खूबसूरत होती है. शायद इसलिए क्योंकि…

2 weeks ago