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1 Comments

  1. कैलाश उप्रेती

    लगता है कि प्रोफेसर पांडे को वास्तविक स्थिति का आंकलन का अनुभव नहीं है,
    आज तिवारी जी के द्वारा लगाए गए उद्योग हजारों लोगों को रोजगार दे रहे है, तिवारी जी नहीं होते तो टाटा, महिंद्रा, बजाज, अशोक लेलैंड जैसे उद्योग नहीं आते,
    यह राज्य का दुर्भाग्य है कि तिवारी जी के बाद ऐसा कर्मठ नेता नहीं मिला, खंडूरी जी जिनसे आशा थी कि कुछ अच्छा करेंगे वह भी लेगे लगाए उद्योगों को उजाड़ने मैं लग गए
    पहाड़ों की दुर्गम भौगोलिक परिस्थिति के कारण यहां छोटे छोटे उद्योग लग सकते हैं, पहाड़ों मैं ट्रांसपोर्टेशन कीमत बहुत ज्यादा है और पानी की कठिनाई है, यहां के लोगों को हर्बल मिशन बहुत अच्छा अल्टरनेट दे सकता है
    आज की सरकार की प्राथमिकता खनन उद्योग की है लेकिन यह उत्तराखंड को उजाड़ने मैं लगा है,
    होटल व्यवसाय को भी प्राथमिकता दी जा रही ही जिसमें बहुत सारों मैं देह व्यापार भी चलता है और इसमें पहाड़ की लड़कियां भी फंस रही हैं,
    भ्रष्टाचार ने लोगों की कमर तोड़ी है, अब शायद ही कोई उत्तराखंड मैं उद्योग लगाने को इच्छुक होगा

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