नई आर्थिक नीतियाँ आईं तो तोंदों की संख्या ख़ूब बढ़ गई. इतनी बढ़ी कि तोंदरोधी विशेषज्ञ पैदा हो गए. नया मार्केट बना. योगा, आयुर्वेदा, हर्बला-फर्बला जाने क्या-क्या माल कमाने के नए अवसर ले आया.... Read more
पोर्न और नशे से अटती जा रही है बच्चों की दुनिया
Posted By: Kafal Treeon:
“हमने कभी सिखाया नहीं, लेकिन हमारा बेटू हमसे ज्यादा मोबाइल के बारे में जानता है” – हर माँ-बाप की नज़र में अपना बच्चा अनूठा ही होता है. अद्वितीय, गजब मेधा वाला होता है. होना... Read more
गाय आगे से ऑक्सीजन छोड़ रही है बत्तख पीछे से
Posted By: Kafal Treeon:
पंतनगर में रहने वाले ललित सती लम्बे समय से अनुवाद कार्य से जुड़े हैं. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थिति उल्लेखनीय है. काफल ट्री के लिए नियमित लिखेंगे. जीडीपी हमारी बहुत बढ़ गई है. पत... Read more
Popular Posts
- उत्तराखंड बजट : स्वयं स्फूर्ति से परिपक्वता की ओर
- बर्बर इतिहास का नाम क्यों ढो रहा है ‘खूनीबढ़’
- कौन थे पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा ‘लकुलीश’?
- कैसे अस्तित्व में आया नारायण आश्रम और कौन थे नारायण स्वामी?
- घमंडी पिता और उसकी सीख
- उत्तराखंड के पेड़-पौधे: लोकज्ञान और औषधीय सत्य
- सामाजिक उत्पीड़न को सम्पूर्णता में व्यक्त करते हैं ‘जागर गीत’
- क्या चंद शासकों से पहले अल्मोड़ा में नंदादेवी का कोई मंदिर था?
- ‘काल्द’ यानी भैरव पहली बार कैसे प्रकट हुए?
- कैसा था नंदा देवी में गायब हुआ परमाणु डिवाइस?
- उपकोशा और उसके वर
- मेहनती भालू और चालाक सियार की लोककथा
- बाल, माल व पटालों का शहर : अल्मोड़ा
- आज ‘नशा नहीं-रोजगार दो आन्दोलन’ की 42वीं वर्षगांठ है
- 200 साल पुराने यात्रा-वृतांत में कुमाऊँ के ‘खस’
- तिवारी मॉडल में पहाड़ की उद्योग नीति और पलायन
- बंदर बहादुर के चोर तेंदुए को जंगल से भगाने वाली लोककथा
- 200 साल पहले कैसा था उत्तराखंड
- जब तक सरकार मानती रहेगी कि ‘पलायन’ विकास की कीमत है, पहाड़ खाली ही होते रहेंगे
- एक रोटी, तीन मुसाफ़िर : लोभ से सीख तक की लोक कथा
- तिब्बती समाज की बहुपतित्व परंपरा: एक ऐतिहासिक और सामाजिक विवेचन
- इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक स्मृति के मौन संरक्षक
- नाम ही नहीं ‘मिडिल नेम’ में भी बहुत कुछ रखा है !
- खेती की जमीन पर निर्माण की अनुमति : क्या होंगे परिणाम?
- नेपाल के रहस्यमयी झांकरी : योगी, वैद्य, तांत्रिक या ओझा?
