आज हर घर में अनुच्छेद 370 और कश्मीर मामलों के एक्सपर्ट बैठे हुए हैं. कोई कश्मीर से लेकर लाहौर तक प्लॉट ख़रीदने की बात कर रहा है तो कोई कश्मीर में ससुराल तलाश रहा है. मुस्लिमों को देश की तरक़... Read more
रेमन मैगसेसे पुरस्कार की शुरूआत 1957 में फ़िलीपींस के राष्ट्रपति रेमॉन मैगसेसे के नाम पर हुई. यह पुरस्कार एशियाई संस्थाओं व व्यक्तियों को सरकारी सेवा, सार्वजनिक सेवा, सामुदायिक नेतृत्व, पत्र... Read more
बाघों की संख्या में उम्मीद से ज़्यादा बढ़ोत्तरी हुई है जो विलुप्ति की कगार पर खड़ी इस प्रजाति के लिए और हम सब के लिए राहत की बात है. इंटरनेशनल टाइगर डे के दिन आई इस ख़ुशख़बरी के अनुसार 2014... Read more
कहते हैं बुज़ुर्गों की डांट-फटकार बच्चों के लिए जीवन का सबब होती थी.मां की डांट को बच्चे नज़रअंदाज़ कर जाते थे लेकिन आमा-बूबू की डांट सुनते ही सन्न रह जाते थे. समय काफ़ी बदल चुका है. अब न तो... Read more
नेपाल कहने को तो भारत की तरह ही एक कृषि प्रधान देश है जिसकी 75 फ़ीसदी आबादी कृषि पर निर्भर करती है लेकिन नेपाल की जीडीपी में सबसे अहम योगदान किसी का है तो वह है टूरिज़्म. 75 फ़ीसदी पहाड़, 10... Read more
चंडी प्रसाद भट्ट का इंटरव्यू
चिपको आंदोलन से सम्बद्ध चंडी प्रसाद भट्ट एक जाने माने पर्यावरणविद् व सामाजिक कार्यकर्ता हैं. उन्हें 1982 में रेमन मैग्सेसे पुरुस्कार,1986 में पद्मश्री, 2005 में पद्मविभूषण, 2014 में गांधी शा... Read more
नानकमत्ता का दीपावली मेला
नानकमत्ता जाना जाता है सिक्खों के पवित्र तीर्थ स्थल गुरुद्वारे, बाउली साहिब, दूध का कुँआ और 24 घंटे चलने वाले लंगर के लिए. इन विशेषताओं के अलावा नानकमत्ता की एक और विशेषता है और वह है यहाँ ह... Read more
9 नवम्बर 2000 आख़िर वो दिन आ ही गया जिसका हर उत्तराखंडवासी को इंतज़ार था. एक लम्बे संघर्ष के बाद पृथक राज्य का निर्माण हुआ. सबकी ऑंखों में एक ही सपना तैरता था कि अपना अलग पहाड़ी राज्य होगा ज... Read more
यह आलेख हमें हमारे पाठक कमलेश जोशी ने भेजा है. कमलेश का एक लेख – सिकुड़ते गॉंव, दरकते घर, ख़बर नहीं, कोई खोज नहीं – हम पहले भी छाप चुके हैं. यदि आप के पास भी ऐसा कुछ बताने को हो... Read more
सिकुड़ते गॉंव, दरकते घर, ख़बर नहीं, कोई खोज नहीं
यह आलेख हमें हमारे पाठक कमलेश जोशी ने भेजा है. यदि आप के पास भी ऐसा कुछ बताने को हो तो हमें kafaltree2018@gmail.com पर मेल में भेज सकते हैं. उत्तराखण्ड राज्य की माँग को लेकर खटीमा सड़कों पर... Read more
Popular Posts
- अब मानव निर्मित आपदाएं ज्यादा देखने को मिल रही हैं : प्रोफ़ेसर शेखर पाठक
- शराब से मोहब्बत, शराबी से घृणा?
- वीर गढ़ू सुम्याल और सती सरू कुमैण की गाथा
- देश के लिये पदक लाने वाली रेखा मेहता की प्रेरणादायी कहानी
- चंद राजाओं का शासन : कुमाऊँ की अनोखी व्यवस्था
- उत्तराखंड में भूकम्प का साया, म्यांमार ने दिखाया आईना
- हरियाली के पर्याय चाय बागान
- हो हो होलक प्रिय की ढोलक : पावती कौन देगा
- हिमालयन बॉक्सवुड: हिमालय का गुमनाम पेड़
- भू कानून : उत्तराखण्ड की अस्मिता से खिलवाड़
- कलबिष्ट : खसिया कुलदेवता
- खाम स्टेट और ब्रिटिश काल का कोटद्वार
- अनास्था : एक कहानी ऐसी भी
- जंगली बेर वाली लड़की ‘शायद’ पुष्पा
- मुसीबतों के सर कुचल, बढ़ेंगे एक साथ हम
- लोक देवता लोहाखाम
- बसंत में ‘तीन’ पर एक दृष्टि
- अलविदा घन्ना भाई
- तख़्ते : उमेश तिवारी ‘विश्वास’ की कहानी
- जीवन और मृत्यु के बीच की अनिश्चितता को गीत गा कर जीत जाने वाले जीवट को सलाम
- अर्थ तंत्र -विषमताओं से परिपक्वता के रास्तों पर
- कुमाऊँ के टाइगर : बलवन्त सिंह चुफाल
- चेरी ब्लॉसम और वसंत
- वैश्वीकरण के युग में अस्तित्व खोते पश्चिमी रामगंगा घाटी के परम्परागत आभूषण
- ऐपण बनाकर लोक संस्कृति को जीवित किया