वीजा के लिए इंतजार : अमेरिकी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल आंबेडकर की जीवनी का हिस्सा
विदेश में लोगों को छुआछूत के बारे में पता तो है लेकिन इससे वास्तविक सामना नहीं पड़ने के कारण वे यह नहीं जान सकते कि दरअसल यह प्रथा कितनी दमनकारी है. उनके लिए यह समझ पाना मुश्किल है कि बड़ी स... Read more
डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बौद्ध धर्म की दीक्षा के मौके पर ली गयी 22 प्रतिज्ञाएँ
डॉ. भीमराव आंबेडकर ने 15 अक्टूबर 1956 को अपने अनुयायियों के साथ हिन्दू धर्म का परित्याग कर बौद्ध धर्म की दीक्षा ली. इस मौके पर उन्होंने सभी के लिए 22 प्रतिज्ञाएँ भी निर्धारित कीं. ये प्रसिद्... Read more
भीमराव आंबेडकर: आधुनिक भारत के निर्माता
भीमराव रामजी आंबेडकर (14 अप्रैल 1891 – 6 दिसंबर 1956) भीमराव आंबेडकर दुनिया के सर्वाधिक लोकप्रिय व स्थापित व्यक्तियों में से एक हैं. जनता के बीच लोकप्रियता के मामले में वे आजादी के नायक कहे... Read more
यह हिस्सा चिली के ख्यात और पूरी दुनिया के अपने कवि पाब्लो नेरुदा की पुस्तक ‘मेमोयर्स’ में है . अधिकांश लोग इससे परिचित हैं, फिर भी एक बार फिर पढ़ लेने लायक है . यह सभी जानते हैं कि पाब्लो भा... Read more
इतिहास के पन्नों से गायब हैं महिलायें
भले ही आज भारत में सबसे लोकप्रिय होने वाले चुटकुले पत्नी प्रताड़ित पतियों के हों, भले ही आज संसद में बैठे पुरुष, महिला आयोग की तर्ज पर एक पुरुष आयोग की मांग कर रहे हों पर हकीकत यह है कि वर्त... Read more
जब रुपया गिरता है तो क्या-क्या होता है?
क्या आपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का (नीचे दिया गया) यह विडियो देखा था? यह तब का विडियो है (2013 का) जब मोदी प्रधानमंत्री नहीं थे. मोदी इस विडियो में रुपये की कीमत के गिरते जाने का फलसफ़... Read more
इक आग का दरिया था और डूब के जाना था – गणित का परचा
मशहूर कथाकार मुंशी प्रेमचंद को गणित हिमालय सी ऊँचाई का लगता था. आगे की कई पीढ़ियों को भी लगा. महावीर को उससे भी ज्यादा. पाँचवी का बोर्ड उसके लिए अभेद्य सा दुर्ग बन गया . चार साल से लुढ़कते-लुढ़... Read more
जैसे-जैसे पंचेश्वर बांध को लेकर कवायद आगे बढ़ रही है, इसने पंचेश्वर में महाकाली और सरयू नदियों में साहसिक पर्यटन से रोजगार चला रहे टूर ऑपरेटर्स और गाइड्स को आशंकाओं में डाल दिया है। टूर ऑपरे... Read more
Popular Posts
- द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा
- हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता
- पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया
- कुमाऊँ की खड़ी होली
- आधी सदी से आंदोलनरत उत्तराखंड का सबसे बड़ा गांव
- फूल, तितली और बचपन
- पर्वतीय विकास – क्या समस्या संसाधन की नहीं शासन उपेक्षा की रही?
- अनूठी शान है कुमाऊनी महिला होली की
- धरती की 26 सेकंड वाली धड़कन: लोककथा और विज्ञान का अद्भुत संगम
- कथा दो नंदों की
- इस बदलते मौसम में दो पहाड़ी रेसिपी
- अल्मोड़े की लखौरी मिर्च
- एक गुरु की मूर्खता
- अगर आपके घर में बढ़ते बच्चे हैं तो जरूर पढ़ें एकलव्य प्रकाशन की किताबें
- प्रेम में ‘अपर्णा’ होना
- यह सिस्टम बचाता है स्विट्ज़रलैंड के पहाड़वासियों को आपदा से
- 10 डिग्री की ठंड में फुटबॉल का जोश : फोटो निबन्ध
- क्या हमें कभी मिलेंगे वो फल जो ट्रेल ने कुमाऊं में खाए?
- प्रबल प्रयास की चाह में सिडकुल और उपजी विषमता
- बर्फ ही नहीं हरियाली भी गायब हो रही है हिमालयी इलाकों से
- उत्तराखंड क्रिकेट टीम से रचा इतिहास
- उत्तराखंड बजट : स्वयं स्फूर्ति से परिपक्वता की ओर
- बर्बर इतिहास का नाम क्यों ढो रहा है ‘खूनीबढ़’
- कौन थे पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा ‘लकुलीश’?
- कैसे अस्तित्व में आया नारायण आश्रम और कौन थे नारायण स्वामी?

