रोटी के साथ उम्मीद भी जुटानी पड़ती है
सड़क चलता कोई व्यक्ति एक्सिडेंट का शिकार हो जाए, इसमें उसकी कोई भूमिका नहीं होती. लेकिन इस दुर्घटना का चौतरफा असर जब उसके जीवन पर पड़ना शुरू होता है तो वह इसे एक अलग-थलग घटना मानकर आगे नहीं... Read more
प्रेम से ज्यादा कमिटमेंट मांगती है जिंदगी
कृष्ण को राधा से प्यार था, लेकिन जब वे गोकुल छोड़कर गए तो फिर लौटकर नहीं आए. बाद में उन्होंने बहुत सी शादियां कीं और आठ तो उनकी पटरानियां थीं. राधा का नाम उनकी ब्याहताओं में नहीं था, न ही इस... Read more
गिलहरी का घोंसला -चन्द्रभूषण घर के सामने एक शहतूत और एक बकाइन का पेड़ है. दोनों मेरे ही लगाए हुए हैं. शकरपुर में लंबे समय तक रहते चिड़ियों की आवाजें भूल गया था. वैशाली, गाजियाबाद में अपना फ्... Read more
आवारा कहूं या कॉस्मोपॉलिटन
कुछ कुत्ते पालतू नहीं बनते. लाख कोशिश करके देख लो, आप उन्हें पालतू बना ही नहीं सकते. पड़ोस के गांव से बहककर कॉलोनी में आ गई एक कुतिया ने दो साल पहले कुछ बच्चे दिए थे, जिनमें दो जिंदा बचे. उन... Read more
यह धरती सबकी साझा है
आज सुबह आते-जाते दो-तीन बार उस पर नजर पड़ी. बुरी तरह भीगा हुआ था और जुगाली भी नहीं कर रहा था. इस घनघोर जाड़े की बरसात में पूरी रात ठरते हुए सीमेंट पर गुजार देना कहीं उसकी छोटी सी मासूम जिंदग... Read more
Popular Posts
- धरती की 26 सेकंड वाली धड़कन: लोककथा और विज्ञान का अद्भुत संगम
- कथा दो नंदों की
- इस बदलते मौसम में दो पहाड़ी रेसिपी
- अल्मोड़े की लखौरी मिर्च
- एक गुरु की मूर्खता
- अगर आपके घर में बढ़ते बच्चे हैं तो जरूर पढ़ें एकलव्य प्रकाशन की किताबें
- प्रेम में ‘अपर्णा’ होना
- यह सिस्टम बचाता है स्विट्ज़रलैंड के पहाड़वासियों को आपदा से
- 10 डिग्री की ठंड में फुटबॉल का जोश : फोटो निबन्ध
- क्या हमें कभी मिलेंगे वो फल जो ट्रेल ने कुमाऊं में खाए?
- प्रबल प्रयास की चाह में सिडकुल और उपजी विषमता
- बर्फ ही नहीं हरियाली भी गायब हो रही है हिमालयी इलाकों से
- उत्तराखंड क्रिकेट टीम से रचा इतिहास
- उत्तराखंड बजट : स्वयं स्फूर्ति से परिपक्वता की ओर
- बर्बर इतिहास का नाम क्यों ढो रहा है ‘खूनीबढ़’
- कौन थे पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा ‘लकुलीश’?
- कैसे अस्तित्व में आया नारायण आश्रम और कौन थे नारायण स्वामी?
- घमंडी पिता और उसकी सीख
- उत्तराखंड के पेड़-पौधे: लोकज्ञान और औषधीय सत्य
- सामाजिक उत्पीड़न को सम्पूर्णता में व्यक्त करते हैं ‘जागर गीत’
- क्या चंद शासकों से पहले अल्मोड़ा में नंदादेवी का कोई मंदिर था?
- ‘काल्द’ यानी भैरव पहली बार कैसे प्रकट हुए?
- कैसा था नंदा देवी में गायब हुआ परमाणु डिवाइस?
- उपकोशा और उसके वर
- मेहनती भालू और चालाक सियार की लोककथा

