बीते रविवार चमोली जिले में हुई बड़ी दुर्घटना में अब तक 32 लोगों के शव अलग अलग जगहों से मिले हैं अभी भी 170 लोगों के लापता होने की बात कही जा रही है. एनडीटीवी द्वारा अपनी वेबसाइट में दुर्घटना से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरें अपलोड की गयी हैं.
(Satellite Images of Chamoli Destruction)
सैटेलाइट से मिली इन तस्वीरों में 7 फरवरी से पहले और उसके बाद ग्लेशियर में हुये परिवर्तन को साफ देखा जा सकता है. तस्वीरों में हुये बदलाव से हिमस्खलन की तीव्रता का अंदाजा लगाया जा सकता है.
स्कॉट वाट्सन से ट्विटर पर हिमस्खलन के मूल के विषय में जानकारी साझा कर लिखा है:
ऋषिगंगा में आई इस तबाही के कारणों की जांच के लिये वाडिया इंस्टीट्यूट देहरादून की एक टीम चमोली को रवाना हो चुकी है. बाढ़ का मुख्य कारण अब तक ग्लेशियर का टूटना ही माना जा रहा है.
(Satellite Images of Chamoli Destruction)
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
रात ढलते ही जब सुबनी और लाली दोनों बहनें पानी भरने के लिए गाँव के…
चीड़ के जंगल उत्तराखण्ड के कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में 900 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर बहुतायत में पाये…
2013 सन् में नेशनल बुक ट्रस्ट ने देवेन्द्र मेवाड़ी की किताब 'मेरी यादों का पहाड़' छापकर सराहनीय…
नौ साल बाद पिथौरागढ़ जा रहा था. पिछले कुछ वर्षों में जब भी छुट्टी मिली, बेटी…
देवी मां उदास है परन्तु परलोक गया पुत्र आज भी यादों में आकर उसको हिम्मत…
पिछली कड़ी : उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी…