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शराब की बहस ने कौसानी को दो ध्रुवों में तब्दील किया

प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत की जन्म स्थली कौसानी,आजादी आंदोलन का गवाह रहा कौसानी, इसी आजादी आंदोलन से उपजे सर्वोदय विचार का केंद्र कौसानी, गांधी के अनासक्ति योग पर टीका की स्थली कौसानी, गांधी विचार से प्रेरित हो भारत आई गांधी की अनन्य विदेशी शिष्या कैथरीन मेरी हाईलामन की कर्मभूमि कौसानी, यहां की प्राकृतिक आबोहवा और नैसर्गिक वातावरण से अभिभूत हो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इसी कौसानी को भारत के स्विट्जरलैंड की संज्ञा दी थी.
(Kausani liquor shop Harish Joshi)

इतनी सारी उपलब्धियों के बाद भी यही कौसानी आजकल एक गैर जरूरी गैर सामाजिक चीज को लेकर चर्चा में है और वो चीज है “शराब”. कौसानी आज की तारीख में एक उभरता हुआ होटल उद्योग स्थल अवश्य बन गया है परन्तु मर्यादित पर्यटन आज भी कौसानी की विशिष्टता रही है परन्तु कौसानी की इस नैसर्गिकता और मर्यादा को छिन्न-भिन्न करने की सोच रखने वाले चंद लोग यहां पर शराब के व्यापार की वकालत कर रहे हैं जबकि समाज का एक बड़ा वर्ग इस बात का समर्थक है कि कौसानी में शराब पूरी तरह से प्रतिबंधित होनी चाहिए.

यूं कहिए कि शराब की इस बहस ने कौसानी को दो ध्रुवों में तब्दील कर दिया है एक बड़ा ध्रुव है जो चाहता है कौसानी शराब और नशा मुक्त था नशा मुक्त रहे. इस बड़े ध्रुव में पद्म पुरस्कार व अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित राधा बहिन, बसंती बहिन और सरला बहिन द्वारा संस्थापित लक्ष्मी आश्रम की कार्यकर्ता बहिनें और उनके साथ ग्रामीण महिला-पुरुष बड़ी संख्या में सरकार के आगे दबाव बनाए हुए हैं कि कौसानी में सरकार द्वारा विज्ञापित शराब की दुकान खोले जाने का निर्णय तुरंत वापस लिया जाए.
(Kausani liquor shop Harish Joshi)

इस बड़े वर्ग की मांग है कि शराब कोई भी हो उससे कौसानी को दूर ही रखा जाए. दूसरी ओर चंद लोगों की एक और जमात है जिनके शराब से व्यापारिक हित जुड़े हुए हैं और वो दलील दे रहे हैं कि कौसानी में तस्करी और अवैध शराब को रोके जाने हेतु यहां पर वैध शराब दुकान खुलनी चाहिए. शराब की विभीषिका से जूझ रहे परिवारों और समाज के लिए शराब अभिशाप है उन्हें वैध अवैध से क्या मतलब. उन्हें तो शराब ही बुराई की जड़ नजर आ रही है और इसी बिला पर वो इसका पुरजोर प्रतिकार कर रहे हैं. वैध और अवैध की दलील दे रहे दूसरे ध्रुव की बातों ने कौसानी के ताजातरीन माहौल से प्रशासन की खासी किरकिरी कर दी है. सिर्फ इस दम पर कि अवैध शराब बिक रही है तो सरकारी शराब दुकान खोल दी जाए ये तर्क आसानी से हजम नहीं हो रहा. शराब अवैध बिक रही है तो प्रशासन क्या कर रहा है इसे रोके जाने की जिम्मेदारी किसकी है वो भी कौसानी जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति के पर्यटक स्थल कौसानी में?

इसी तरह के सवालों की लंबी फेरहिस्त में इसका एक दुखद पक्ष भी सामने आया है कि राष्ट्र कवि सुमित्रानंदन पंत की जन्म स्थली कौसानी में उनके रचना संसार को आम पर्यटकों व लोगों तक परिचित कराने के मौलिक उद्देश्य से राजकीय संग्रहालय की देखरेख में यहां पर पंत वीथिका संस्थापित है जिसमें कविवर पंत का साहित्य और उनके जीवन की धरोहर संरक्षित है. साहित्य और शोध की गतिविधियों की केंद्र इस वीथिका में वर्ष पर्यन्त साहित्यिक गतिविधि और साहित्य पर्यटन से जुड़े लोगों की आवक बनी रहती है परन्तु जानकर आश्चर्य हुआ कि शराब समर्थकों के समूह ने बीते दिनों एक बैठक बाकायदा पंत वीथिका में की.

कितना हास्यास्पद और असहनीय कृत्य है जो स्थल साहित्य और शोध की आधारभूत इकाई है, वो भी एक सरकारी प्रतिष्ठान उसे क्यों और कैसे इस तरह की असामाजिक गतिविधि की बैठक के लिए आवंटित कर दिया गया. बेहद शर्मिंदगी महसूस होना स्वाभाविक है कि समाज और व्यवस्थाएं  किस दिशा में जा रही हैं, कहना न होगा कि कौसानी से उपजी ये अराजकता समाज चितेरे सम विचारक लोगों और संगठनों की ओर से एक बड़े आंदोलन को जन्म दे दे.
(Kausani liquor shop Harish Joshi)

-हरीश जोशी

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  • कौसानी के शांत और ज्ञानवर्धक वातावरण में शराब के चलन को आधिकारिक प्रोत्साहन देना बहुत बहुत गलत है। खैर, कमाऊ और खाऊ राजनैतिक-सह-व्यापारिक आकाओं से, इससे अधिक उम्मीद कर भी कैसे सकते हैं?

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